आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। सिख पंथ के नौवें गुरु श्री तेग बहादुर साहिब जी महाराज, भाई मति दास जी, भाई सति दास जी एवं भाई दयाला जी के 350 वें शहीदी दिवस पर गुरु घर में आस्था की अभिव्यक्ति के साथ श्रद्धा का अर्पण किया गया। नगर के मातवरगंज स्थित श्री सुंद गुरुद्वारे में सुबह सिख पंथ के लोगों के साथ सनातन समाज के लोगों ने भी गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेका और शहीद गुरु के प्रति श्रद्धा का अर्पण कर खुद धन्य महसूस किया। इस दौरान ज्ञानी सुनील सिंह ने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी को साहस और शौर्य के प्रतीक के लिए जाना जाता है। 1675 में उन्होंने धर्म, मानवता और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्चाई और न्याय के लिए कभी भी पीछे नहीं हटना चाहिए। वे एक महान योद्धा, धर्म गुरु और देशभक्त थे। उन्होंने धर्म, इंसानियत और देश की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। इसी कारण उन्हें ‘हिंद की चादर’ का सम्मान मिला। उनके शहीदी दिवस पर हमें उनके आदर्शों को याद करना चाहिए। उन्होंने हमें सिखाया कि धार्मिक स्वतंत्रता और मानव कल्याण कितने महत्वपूर्ण हैं।
उधर संगतों ने सबद-कीर्तन कर गुरु दरबार को निहाल कर दिया। सबद-कीर्तन के बाद अरदास और कड़ाह प्रसाद का वितरण किया गया। उसके कुछ देर बाद लंगर का आयोजन किया गया जिसमें सभी लोगों ने साथ में बैठकर गुरु का प्रसाद ग्रहण करने के साथ सामाजिक और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।
रिपोर्ट-सुबास लाल