पटवध आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। शहर की सड़कों पर वाहनों के तेज हॉर्न का शोर लगातार लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। ट्रक, बस और अन्य भारी वाहनों में लगे तेज आवाज वाले हॉर्न राहगीरों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। खासकर भीड़भाड़ वाले इलाकों और आबादी के बीच अचानक बजने वाले तेज हॉर्न से लोग परेशान हैं। सवाल यह है कि नियमों के बावजूद ऐसे वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी?
शहर में दिनभर भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। इस दौरान कई वाहन सामान्य हॉर्न के बजाय तेज आवाज वाले हॉर्न का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं। सड़क किनारे चल रहे राहगीरों के पास से अचानक तेज आवाज में हॉर्न बजने पर वे चौंक जाते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और अस्वस्थ लोगों के लिए यह स्थिति और परेशानी वाली हो सकती है।
शहरवासियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा और ध्वनि प्रदूषण दोनों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। लोगों ने आरटीओ और यातायात पुलिस से तत्काल विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। अब देखना है कि लगातार उठ रही शिकायतों के बाद जिम्मेदार विभाग सड़कों पर उतरकर जांच अभियान शुरू करते हैं या तेज हॉर्न का शोर यूं ही जारी रहता है।
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नियम हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं?
आजमगढ़। वाहनों में हॉर्न के इस्तेमाल को लेकर मोटर वाहन नियमों में प्रावधान हैं और निर्धारित मानकों से अधिक तेज आवाज वाले हॉर्न पर कार्रवाई की जा सकती है। इसके बावजूद शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर ऐसे हॉर्न का इस्तेमाल दिखाई देना प्रवर्तन व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि परिवहन विभाग और यातायात पुलिस नियमित रूप से वाहनों की जांच करें तो नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान आसानी से हो सकती है। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर सड़कों पर चल रहे वाहनों की जांच के दौरान तेज आवाज वाले हॉर्न की जांच कितनी नियमितता से की जा रही है?
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सिर्फ चालान नहीं, अभियान की जरूरत
आजमगढ़। लोगों की मांग है कि मामले में केवल औपचारिक कार्रवाई के बजाय विशेष जांच अभियान चलाया जाए। शहर के प्रमुख मार्गों, चौराहों, बस अड्डे और भारी वाहनों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में वाहनों की जांच की जाए। प्रतिबंधित या मानकों के विपरीत हॉर्न मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई के साथ उसे हटवाने की व्यवस्था भी हो।
रिपोर्ट-बबलू राय