अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। पर्यावरण असंतुलन और आधुनिकता की दौड़ में बेजुबान पक्षियों के उजड़ते आशियानों को संवारने के लिए एक सराहनीय व अनूठी पहल की गई है। सधनपट्टी निवासी समाजसेवी अखिलेश सिंह के प्रयासों से क्षेत्र में चार आधुनिक पंछी रैन बसेरा स्थापित किए जा रहे हैं। 23 अक्टूबर को श्रीराम कथावाचक राजन महाराज के कर-कमलों द्वारा दो नव-निर्मित पंछी रैन बसेरों का भव्य लोकार्पण किया जाएगा।
सर्वप्रथम वे बाबा प्रथमदेव (बहिरादेव) गौरा, अतरौलिया स्थित पंछी रैन बसेरा का लोकार्पण करेंगे। इसके पश्चात पौहारी बाबा धाम, सरैया पहुंचकर दूसरे पंछी रैन बसेरा का लोकार्पण करेंगे। कार्यक्रम को भव्य एवं सुव्यवस्थित रूप देने के लिए समाजसेवी अखिलेश सिंह, पूर्वांचल विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष मुकेश श्रीवास्तव, अखंड सिंह और राजेंद्र सिंह सहित क्षेत्रीय संभ्रांत जनों ने मदियापार और गौरा स्थित कार्यक्रम स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने प्रथमदेव मंदिर व समाधि स्थल पर मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया।
समाजसेवी अखिलेश सिंह ने बताया कि आज अंधाधुंध कटते पेड़ों और कंक्रीट के विस्तार से पक्षियों का प्राकृतिक आवास छिन चुका है। पहले खेतों-खलिहानों में उन्हें भरपूर दाना मिल जाता था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। इसी पीड़ा को देखकर मन में भाव आया कि क्षेत्र में पक्षियों के लिए आश्रय स्थल बनाया जाए। इस एक टावर में 5,000 से 10,000 पक्षियों के रहने की सुरक्षित व्यवस्था होगी। साथ ही मैंने यह संकल्प लिया है कि मेरे खेतों से उत्पन्न होने वाला धान और गेहूं अब बेचा नहीं जाएगा, बल्कि इन चारों रैन बसेरों में पक्षियों के दाने-पानी के लिए समर्पित रहेगा। भविष्य में प्रभु कृपा रही तो 2028 में पुनः भव्य रामकथा का आयोजन भी कराया जाएगा।
पूर्वांचल विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष मुकेश श्रीवास्तव (निवासी खजुरी) ने कहा कि सनातन धर्म का मूल मंत्र ही जियो और जीने दो तथा परहित सरिस धर्म नहिं भाई है। अखिलेश सिंह गुप्त रूप से निर्धनों, असहायों और बीमारों की सेवा में सदैव तत्पर रहते हैं और अब मूक परिंदों की चिंता कर उन्होंने मानवता की मिसाल पेश की है।
रिपोर्ट-आशीष निषाद