अकीदत के साथ मनाया गया 108वां उर्स-ए-आला हजरत

शेयर करे

अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। स्थानीय नगर पंचायत स्थित जामा मस्जिद में आला हजरत इमाम अहमद रजा खान का 108वां उर्स-ए-पाक बड़े ही अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। अध्यक्षता पेश इमाम मौलाना मोहम्मद अब्दुल बारी नईमी आज़मी ने की। उन्होंने आला हजरत के जहानत और इल्मी खिदमात पर रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि आला हजरत ने महज 4 साल की उम्र में कुरान-ए-पाक का नाज़ेरा मुकम्मल कर लिया था। 6 साल की उम्र में उन्होंने अरब के एक व्यक्ति से अरबी भाषा में घंटों तक चर्चा की, जिससे लोग हैरान रह गए।
अपनी अद्भुत बौद्धिक क्षमता का परिचय देते हुए उन्होंने मात्र 8 साल की अवस्था में अरबी की मशहूर किताब ‘हिदायतुननह’ की अरबी में ही शरह (व्याख्या) लिख दी थी। 13 साल 10 महीने और 5 दिन की अल्पायु में उन्होंने तमाम दीनी व दुनियावी फुनून (विद्याओं) की शिक्षा ग्रहण कर मुकम्मल कामयाबी हासिल की। मौलाना अब्दुल बारी ने बताया कि आला हजरत ने अपने जीवनकाल में 1000 से भी अधिक किताबें लिखीं, जो आज भी समाज और इंसानियत के मार्गदर्शन का जरिया बनी हुई हैं।
इनसेट—
बरेली शरीफ में जन्मी वो महान शख्सियत
अतरौलिया (आजमगढ़)। आला हजरत का जन्म 14 जून 1856 ई. को बरेली शरीफ के एक दीनी और शिक्षित घराने में हुआ था। उनका विसाल (निधन) 28 अक्टूबर 1921 ई. को बरेली में ही हुआ। आला हजरत के कारनामे रहती दुनिया तक याद किए जाएंगे। हर साल 25 सफर को बरेली शरीफ में उनका उर्स-ए-पाक बड़े पैमाने पर मनाया जाता है, जहां दुनिया के कोने-कोने से लोग उनके आस्ताने पर हाजिरी देकर खिराज-ए-अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश करते हैं।
रिपोर्ट-आशीष निषाद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *