बिलरियागंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। महाराजगंज और बिलरियागंज विकासखंड के अंतर्गत सैकड़ो एकड़ के क्षेत्रफल में फैला देवनई का ताल किसानों के लिए बिहार का शोक कही जाने वाली कोसी नदी से कम नहीं है। देवनई ताल जो दर्जनों गांव की सीमाओं को छूता हुआ लगभग 2 किलोमीटर दूरी में फैला हुआ है। जिसके किनारे हजारों एकड़ में किसानों की खेती योग्य भूमि है। जिसमें किसान धान की फसल की रोपाई तो करते हैं ,लेकिन फसल पकने के पहले ही डूब जाती है और किसानों के हाथ मायूसी ही लगती है।
गेहूं की फसल की बुवाई करना तो दूर है। इस ताल से 100 मीटर की दूरी पर शारदा सहायक खंड 32 की नहर निकलती है और इस नहर में दर्जनों अवैध पाइप लगाकर लोगों द्वारा नहर का पानी हमेशा ताल में बहाया जाता है जिसके कारण बारिश न होने के बाद भी ताल में पानी का स्तर बढ़ता रहता है जिसकी शिकायत किसानों द्वारा नहर विभाग के अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। जबकि इस ताल के किनारे चरनई, ककरही दुलार, बालमपट्टी, भैंसहा, मंदरेपुर, कोटीहार किशुनदेव आदि गांव के किसानो की सैकड़ो एकड़ खेती योग्य जमीन है, जो पहले इसी ताल के सहारे इसमें अच्छी खेती करते थे। लेकिन नहर के पानी के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती है।
वहीं भैंसहा और बालमपट्टी गांव के किसान चंद्र प्रकाश मिश्रा, कोदई विश्वकर्मा, सीताराम सिंह आदि का कहना है कि पहले इस ताल का अतिरिक्त पानी ताल से होकर जा रहे राजबाहे द्वारा छोटी सरयू नदी में जाकर गिरता था, जो लोगों द्वारा जगह जगह अतिक्रमण कर लेने के कारण सकरा और ऊंचा हो गया है। यह राजबाहा 6 किलोमीटर दूरी तय करते हुए छोटी सरयू नदी में जाकर मिलता है, जो नदी महाजी सिंघवारा से होकर जाती है। इसका अधिक भाग महाराजगंज विकासखंड में पड़ता है जो चरनई, नगवा मैंदो, कोटिहार, चांदपुर, लखेश्वर इटौरा साटन, शेरपुर, महवी, माधोपुर, सिंघवारा आदि गांव से होकर जाता है।
इस संबंध में शारदा सहायक खंड 32 के अधिशासी अभियंता हर्ष गुप्ता ने बताया कि नहर पर जल्द ही काम शुरू होगा। नहर में लगे अवैध पाइपों को बंद कराया जाएगा।
रिपोर्ट-तारकेश्वर मिश्र