अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। बूढ़नपुर तहसील क्षेत्र के देहुला मोती गांव में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के बावजूद जमीन दूसरे व्यक्ति को बेचने और 12 लाख रुपये हड़पने का मामला सामने आया है। पीड़ित वैभव पांडेय और रितिक पांडेय ने जिलाधिकारी को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर विक्रेता और जमीन के दूसरे खरीदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पीड़ितों ने परिवार को फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए सुरक्षा की गुहार भी लगाई है।
देहुला मोती निवासी वैभव पांडेय और रितिक पांडेय पुत्रगण दिनेश चंद पांडेय ने गांव के ही रणजीत पांडेय पुत्र राजेंद्र पांडेय से आराजी संख्या 157 में स्थित 0.0681 हेक्टेयर भूमि में से छह बिस्वा जमीन खरीदने का सौदा 14 लाख रुपये में तय किया था। आरोप है कि नौ अक्तूबर 2025 को रणजीत पांडेय ने 12 लाख रुपये नकद लेकर रजिस्टर्ड मुआहिदा बय (एग्रीमेंट) किया और जमीन का भौतिक कब्जा भी सौंप दिया। शेष दो लाख रुपये बैनामा के समय एक वर्ष के भीतर देने की सहमति बनी थी। वैभव पांडेय के मुताबिक, शेष रकम देकर जमीन का बैनामा कराने के लिए उन्होंने बीते 29 जुलाई और 30 सितंबर को विधिक नोटिस भेजे। इसके साथ ही सात अक्तूबर को रजिस्ट्री कार्यालय में उपस्थित होकर बैनामा करने को कहा गया, लेकिन आरोप है कि विक्रेता उपस्थित नहीं हुआ।
पीड़ितों का आरोप है कि एग्रीमेंट की निर्धारित अवधि नौ अक्तूबर तक होने के बावजूद रणजीत पांडेय ने 25 सितंबर को उसी जमीन का बैनामा श्रीकांत पांडेय पुत्र जय नारायण पांडेय के नाम कर दिया। पीड़ितों ने इसे उनके साथ धोखाधड़ी बताते हुए दोनों पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि रुपये वापस मांगने और जमीन के बैनामे की बात करने पर रणजीत पांडेय ने रकम देने से इनकार कर दिया। पीड़ितों का कहना है कि आरोपी ने कथित तौर पर आत्महत्या करने और सुसाइड नोट में दोनों भाइयों समेत परिवार के सदस्यों के नाम लिखकर उन्हें जेल भिजवाने की धमकी दी।
पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी सोशल मीडिया पर रजिस्टर्ड एग्रीमेंट को झूठा बताते हुए इसे ब्याज के रुपये का मामला बता रहा है, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है।
पीड़ितों ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और स्थानीय पुलिस प्रशासन से मामले की जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी और मानहानि समेत लागू कानूनी प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है। साथ ही परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है। फिलहाल, शिकायती पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं है। मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना बाकी है।
रिपोर्ट-आशीष निषाद