आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। पूरे मनोयोग से किये गये प्रयास से किसी काम में कामयाबी एक दिन में तो नहीं मिलती लेकिन एक दिन जरूर मिलती है। उक्त बातें आदर्श अनौपचारिक शिक्षा अनुदेशक, पर्यवेक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की जिला स्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए जिलाध्यक्ष शारंगधारी यादव ने कही।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि पूर्व में संचालित अनौपचारिक शिक्षा योजना में कार्यरत रहे कुछ अनुदेशकों एवं पर्यवेक्षकों को काफी संघर्षों के बाद 2005 में शिक्षामित्रों की नियुक्ति में प्रथम वरीयता प्रदान करते हुए समायोजित किया गया था। किन्तु शासनादेश में विसंगतियों के कारण बहुत से अनुदेशक, पर्यवेक्षक वंचित रह गये थे जो शासन प्रशासन के आश्वासनों की चक्की में पिसते रहे। अन्त में 2016 में संगठित होकर उच्च न्यायालय में इंसाफ पाने के लिए याचिकाए दाखिल किये। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह उल्लेख किया है कि सर्वाेच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद प्रदेश सरकार इन याचियों का समायोजन न करके भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का स्पष्ट रूप से हनन कर दिया है। अन्त में उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि राज्य सरकार इन याचियों की दीर्घकालीन सेवा और 20 वर्षाे से अधिक न्यायालयों का चक्कर लगाने में समय की बर्बादी को ध्यान में रखते हुए 21.04.22 से 6 माह में नीति निर्धारित करके इनकी योग्यता तथा पात्रता के अनुसार राज्य के किसी भी विभाग में समायोजित करके नियमित वेतन का भुगतान करे। जिला संरक्षक कृष्ण मोहन उपाध्याय ने कहा कि 21 अक्टूबर 2022 तक यदि सरकार शासनादेश जारी नहीं करेगी तो संगठन के याचीगण अवमानना का मुकदमा दाखिल करने के लिए बाध्य हो जायेंगे। बैठक में सभी याचिकाओं में कैविएट दाखिल करने पर भी विचार किया गया तथा सर्वसम्मति से कैविएट दाखिल करने का निर्णय लिया गया। बैठक में जिले के सैकड़ों अनुदेशक, पर्यवेक्षक उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता शारंगधारी यादव तथा संचालन लालसा प्रसाद यादव ने किया।
रिपोर्ट-ज्ञानेन्द्र कुमार