अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। ऐसे में जागरूक परिजनों की सूझबूझ और चिकित्सकों की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय अमर शहीद राजा जयलाल सिंह सौ शैयायुक्त चिकित्सालय में समय पर इलाज मिलने से सांप के काटने से पीड़ित एक छात्रा की जान बचा ली गई।
हाल ही में एक छात्रा को सांप ने उंगली में काट लिया था। घटना के बाद परिजनों ने झाड़-फूंक या अंधविश्वास में समय गंवाने के बजाय समझदारी दिखाई और बच्ची को तुरंत अतरौलिया स्थित सौ शैया संयुक्त अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में मौजूद चिकित्सक डॉ. राजन वर्मा ने बिना देरी किए तत्काल उस छात्रा का इलाज शुरू किया। समय पर मिले सही उपचार के कारण छात्रा की हालत में तेजी से सुधार हुआ और वह अब पूरी तरह स्वस्थ है। छात्रा के पिता राजेंद्र प्रसाद ने बताया, बेटी को सांप काटते ही हम सीधे अस्पताल भागे। डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया और मेरी बेटी की जान बच गई। डॉ. राजन वर्मा ने बताया कि बरसात के दिनों में अस्पताल में सर्पदंश के मरीज लगातार आ रहे हैं। उन्होंने लोगों को जागरूक करते हुए महत्वपूर्ण सलाह दी कि सभी सांप जहरीले नहीं होते। कई बार मरीज डर और घबराहट के कारण अधिक परेशान हो जाता है, जिससे उसकी सांसें तेज चलने लगती हैं। मरीज को शांत रखें। प्रभावित अंग पर चीरा न लगाएं, मुंह से जहर चूसने की कोशिश न करें और न ही रस्सी या कपड़े से अंग को बहुत कसकर बांधें। जिस अंग में सांप ने काटा है, उसे कम से कम हिलाएं-डुलाएं। सर्पदंश के मरीजों को डॉक्टरों की देखरेख में कम से कम 24 घंटे रखा जाता है, क्योंकि कुछ मामलों में विष का असर देर से दिखाई देता है। उन्होंने बताया सर्पदंश के मामलों में गोल्डन टाइम (शुरुआती 1 से 2 घंटे) सबसे महत्वपूर्ण होता है। मरीज जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचेगा, उसके बचने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी। डॉ राजन वर्मा ने सलाह दी है कि बरसात के मौसम में खेतों, झाड़ियों, अंधेरी जगहों और जलभराव वाले क्षेत्रों में जाते समय विशेष सतर्कता बरतें, टॉर्च का प्रयोग करें और सर्पदंश की स्थिति में केवल और केवल नजदीकी सरकारी अस्पताल पर ही भरोसा करें।
रिपोर्ट-आशीष निषाद