बूढ़नपुर आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है यदि यह कहा जाए तो यह गलत नहीं होगा क्योंकि कुछ ऐसा ही नजारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोयलसा में पड़ताल के दौरान देखने को मिली। यहां पर दुर्व्यवस्थाओं का अंबार मिला।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोयलसा में दलालों का दबदबा है। यहां लगभग हर डाक्टर के साथ एक दलाल आपको नजर आ जाएगा। वह डाक्टरों के साथ रहकर मरीज को बाहर से दवाई लिखने का काम करता है और बदले में अच्छा खासा कमीशनखोरी करता है। ध्रुविक नामक डेढ़ वर्षीय बच्चे की तबियत खराब थी। उसके माता पिता उसे लेकर डाक्टर के पास गए। डाक्टर द्वारा उसके पर्चे के ऊपरी हिस्से पर अंदर से दवा लिखी गई थी जबकि दूसरी तरफ बाहर से दवा लिखी गई थी।
मीडिया की टीम ने जब अस्पताल के फार्मासिस्ट से इस बारे में जानकारी ली तो पता चला कि जो दवाएं पर्चे पर लिखी गई हैं वह उनके पास उपलब्ध है और जो दवा दूसरी तरफ लिखी गई है वह बाहर की दवा है। जब सरकार का स्पष्ट निर्देश है की दवाइयां अस्पताल के अंदर से ही देना है तो फिर मरीज को बाहर से क्यों दवा लिखी जा रही है ? क्या जो दवाएं बाहर से लिखी जा रही हैं उनकी आवश्यकता है या फिर कमीशन खोरी के चक्कर में यह सब हो रहा है ?
मीडिया की टीम वहीं पर स्थित महिला अस्पताल में पहुंची जहां पर डाक्टर के चेंबर में एक प्राइवेट महिला मौजूद थी। जब उस महिला से पूछा गया कि आप कौन हैं तो उसका जवाब था स्टाफ नर्स। लेकिन फिर मीडिया की टीम जैसे ही वीडियोग्राफी करना शुरू की महिला वहां से भाग खड़ी हुई। बाद में पता चला कि वह महिला कोई स्टाफ नर्स नहीं बल्कि बाहरी महिला है।
यही नहीं अस्पताल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जो कर्मचारी कार्य कर रहे हैं कई कई महीनों से उनका वेतन नहीं मिला है। वह लोग अपने वेतन के लिए अस्पताल के अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दे रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से इन सब से बेखबर है। फिलहाल इन सब के बारे में जब बातचीत करने के लिए अस्पताल के अधीक्षक डा. देवानंद यादव के कमरे में जाया गया तो वे खुद अपने कमरे से नदारद मिले। आखिर अस्पताल का जवाबदेह कौन है यह सबसे बड़ा सवाल है।
रिपोर्ट-अरविंद सिंह