आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा की ओर से अहरौला के जनता इंटर कालेज में फसल अवशेष प्रबंधन पर मोबिलाइजेशन ऑफ स्कूल स्टूडेंट्स कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान फसल अवशेष प्रबंधन पर चित्रकलाएवं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें 150 बच्चों ने प्रतिभाग किया।
चित्रकला प्रतियोगिता में युवराज यादव प्रथम, आकृति कुमारी द्वितीय, नेहा राजभर तृतीय एवं वीरू यादव, शिवांश सिंह, अंशिका निषाद ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया। निबंध में कशिश प्रथम, नैंसी द्वितीय, आकांक्षा यादव तृतीय, अनु, गायत्री, सामिया एवं काशिफा ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया। क्विज प्रतियोगिता में पुष्पांजलि प्रथम, अंतिमा द्वितीय, आंचल ने तृतीय एवं दिव्यांशी यादव, अंशिका यादव तथा साक्षी ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया। सभी को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कालेज के प्रबंधक प्रवेश कुमार तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फसल अवशेष को खेत में जलाने से रोकना है। केवीके के अध्यक्ष डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि किसान पराली को खेत में मिलाएं तथा खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाएं। पराली में आग लगाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है एवं आवश्यक पोषक तत्वों का नुकसान होता है।
उन्होंने कहा कि फसल अवशेष हमारे खेत के लिए भोजन का काम करते हैं जो कि खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के साथ-साथ उसमें उत्पादित उपज की गुणवत्ता को भी बढ़ाते हैं। इस मौके पर रवि नारायण तिवारी, पंकज शर्मा, अजय कनौजिया, सत्यम यादव, निखिल शर्मा, झिनकू मौर्य, अशोक प्रजापति, जोगेंद्र यादव, विनीत पांडेय, बलकेश प्रजापति, सहायक अध्यापिका मे डिम्पल यादव, महिमा , रागिनी, ज्योति, नेहा, सीमा, शीतल का सहयोग रहा।
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पराली को खेत में मिलाने से बढ़ेगी उर्वरा शक्तिः शेर सिंह
आजमगढ़। केवीके के सस्य वैज्ञानिक डॉ. शेर सिंह ने बताया कि 1 टन पराली को खेत में मिलाने पर 5.5 किलोग्राम नत्रजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाश, 1.2 किलोग्राम गंधक के अलावा आवश्यक मात्रा में सूक्ष्म पोषक तत्व सूक्ष्मजीव होते हैं जो खेत की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में काम आते हैं। 1 टन पराली में आग लगाने से 3 किलोग्राम सूक्ष्म कणों के भाग, 60 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड गैस, 1460 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड गैस, 199 किलोग्राम राख, 2 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड गैस के अलावा विभिन्न तरह का प्रदूषण होता है जो हमारे शरीर में आंखों व फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डा महेंद्र प्रताप ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन की कई मशीनें हैं जो किसानों को अनुदान पर देय हैं। प्रक्षेत्र प्रबंधक वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि यदि आधा किलोग्राम यूरिया प्रति बिस्वा की दर से फसल अवशेष पर छिड़काव किया जाए तो पुआल खेत में गलकर खाद में परिवर्तित हो जाएगा।
रिपोर्ट-सुबास लाल