मार्टिनगंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। सनातन परंपरा में अक्षय तृतीया का विशेष धार्मिक महत्व है। बैसाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व, इस वर्ष सोमवार, 20 अप्रैल को पड़ेगा। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ और पुण्य कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता, इसीलिए इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।
इस बार अक्षय तृतीया कई दुर्लभ और शुभ संयोगों के साथ आ रही है। करीब 10 वर्ष बाद यह पर्व सोमवार को पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है। पंडित गिरजा प्रसाद पाठक ज्योतिषाचार्य एवं कर्मकांड विशेषज्ञ, माता अष्टभुजी धाम के पुजारी ने बताया कि ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी-अपनी उच्च राशियों में रहेंगे, जिससे इनका प्रभाव सामान्य से कई गुना अधिक (लगभग 100 गुना तक) फलदायी माना जा रहा है।
उन्होंने बताया कि तृतीया तिथि 19 अप्रैल को दोपहर 1.01 मिनट से शुरू होकर, 20 अप्रैल को सुबह 10.39 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर पूरे देश में यह पर्व 20 अप्रैल को ही मनाया जाएगा। इससे पहले 9 मई, 2016 को अक्षय तृतीया सोमवार के दिन पड़ी थी।
रिपोर्ट-अद्याप्रसाद तिवारी