आजमगढ़। समूहन कला संस्थान द्वारा जनपद के जीडी ग्लोबल स्कूल में हमारी संस्कृति-हमारी पहचान विषय पर छात्रों के लिए एक कार्यशाला आयोजित की गई, जिसका संचालन संजीव पाण्डेय ने किया। परफार्मिंग आर्ट को लेकर विद्यार्थी किस प्रकार उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकते है। इस बात पर व्यापक प्रकाश डाला गया। साथ ही साथ छात्रों को ‘‘मूक-अभिनय’’ का प्रदर्शन भी दिखाया गया जिसे माइम विधा के प्रतिष्ठित कलाकार राजकुमार शाह ने प्रस्तुत किया।
मूक-अभिनय पर वार्ता करते हुए श्री शाह ने कहा कि इसमें भाषा का अभाव है। यह भावों और भंगिमाओं की मूक भाषा में व्यक्त होता है, जो सार्वभौम है। यह किसी भाषा विशेष की सीमा से बंधी नहीं है। हमारा यह मूक संप्रेषण मानव शरीर और मस्तिष्क का ऐसा मिश्रण है जिससे हम अपने शरीर और चेहरे से अपनी बात प्रकट करते हैं, बिना किसी भाषायी संवाद के। मूकाभिनय के संदर्भ हजारों वर्ष पूर्व से आचार्य भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में उपलब्ध है। इसके सभी पहलुओं पर विस्तृत वर्णन नाट्यशास्त्र में होना इस बात का प्रमाण है कि यह प्राचीन भारतीय कला है। सार्वभौम नाट्य तत्वों अभिनय, नृत्य ताल को स्वायत्त किये हुए इस शैली में शारीरिक गतिविधियां और चेष्टायें ही अभिव्यक्ति का सशक्त और सार्थक माध्यम है। इस प्रस्तुति में काल्पनिक वस्तुओं के साथ और शरीर की शैलीकृत मूवमेंट सभी के लिए रोमांच और सुखद अनुभूति दे गया। आयोजन में अवसर पर छात्र-छात्राओं के समूह के साथ विद्यालय के निदेशक गौरव अग्रवाल, प्रिंसिपल मोनिका सारस्वत पाण्डेय, संचालन कर रहे संजीव पाण्डेय, कुमुद चतुर्वेदी एवं अन्य शैक्षिक स्टाफ कई विशिष्ट लोगों ने इस अनोखी विधा का रसास्वादन किया।