आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। राष्ट्रीय सामाजिक न्याय आंदोलन के पदाधिकारियों तथा सामाजिक न्यायवादियों और शुभचिंतकों की आपात बैठक कुंवर सिंह उद्यान में हुई। बैठक में यूजीसी रेगुलेशन को शीघ्र और मजबूती से लागू करने के लिए 16 फरवरी को धरना प्रदर्शन और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया।
यूजीसी रेगुलेशन और उच्च शैक्षणिक संस्थानों में दलित, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों महिलाओं तथा दिव्यांग के विरुद्ध अत्याचार, भेदभाव, उत्पीड़न पर बुद्धिजीवियों ने गंभीर विचार विमर्श और मंथन किया। बहस में पाया गया कि आज भी जाति हिंदुस्तान की सच्चाई है। सामंत और ब्राह्मणवादी सोच अत्यधिक घृणित अवस्था में पहुंच रही है। उच्च शैक्षणिक संस्थानों में दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक, दिव्यांगों और महिला छात्र, छात्राएं ही नहीं, ऐसे संस्थानों में कार्यरत प्रोफेसर भी इस घृणित सोच के शिकार और उत्पीड़ित भेदभावपूर्ण रवैया से ग्रस्त हैं। विवशता में यह अपमान के घूंट पीकर बर्दाश्त कर रहे हैं।
यूजीसी रेगुलेशन के क्रियान्वयन पर रोक लगाने में सरकार की बड़ी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में पूरे देश में यूजीसी रेगुलेशन को कड़ाई से लागू करने के लिए आंदोलन चल रहे हैं। इसी कड़ी में पूर्ण रूप से इन आंदोलनों का समर्थन करने और यूजीसी रेगुलेशन को लागू करने के लिए राष्ट्रीय सामाजिक न्याय आंदोलन के बैनर तले 16 फरवरी को अंबेडकर पार्क में धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया है।
बैठक में का. दुखहरन सत्यार्थी, रामनयन यादव, दान बहादुर मौर्य, रामराज, राम जनम यादव, दिनेश यादव, देवनाथ यादव, काशीनाथ यादव, राजकुमार यादव, अरविंद कुमार भारती, राजपति यादव, मंतराज यादव शामिल रहे। अध्यक्षता और संचालन जिलाध्यक्ष रामकुमार यादव ने किया।
रिपोर्ट-प्रमोद यादव/ज्ञानेन्द्र कुमार