आज़मगढ़ (सृष्टिमीडिया)। शनिवार को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, शिक्षा मंत्रालय नई दिल्ली के सहयोग से, डीएवी महाविद्यालय में चल रहे राष्ट्रीय संगोष्ठी के तकनीकी सत्र के मुख्य अतिथि जननायक चन्द्रशेखर विश्विद्यालय के कुलपति प्रो.संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का उत्तरोत्तर विकास वहां के स्थानीय और पारंपरिक उद्योगों के पुनर्बलन और सहयोगात्मक व सरल कराधान प्रक्रिया के बगैर नहीं हो सकता। जीएसटी के कर विधान को भी बुनकरों व ऐसे पारम्परिक उद्योगों के लिए सरलतम और न्यूनतम रूप प्रदान करना आवश्यक होगा।
समापन सत्र में सारस्वत अतिथि महाराजा सुहेलदेव के कुलपति प्रो.संजीव कुमार ने कहा कि आर्थिक कानून और कराधान की नीतियां राष्ट्र के आर्थिक विकास का मुख्य अंग होती हैं। ऐसे संगोष्ठियों में शिक्षा के मंदिरों से निकले विचार पुंज उन कानूनों और कराधान के नीति निर्माण के पथ प्रदर्शक बन विकसित राष्ट्र के विकास में सम्बल प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम को डॉ.अजय कुमार सिंह, डॉ.सतपाल सिंह, डॉ.प्रदीप कुमार सिंह ने भी सम्बोधित किया। अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य प्रो. प्रेमचंद्र यादव ने कहा कि अर्थव्यवस्था किसी देश के परिचालन का मुख्य आधार है, इसलिए इसे गतिमान बनाने के लिए नीतियां व्यापक विचार विमर्श के आधार पर बननी चाहिए। डॉ. अमित कुमार सिंह ने आये हुए अतिथियों का वैचारिक अभिनन्दन किया। संगोष्ठी के निदेशक प्रो.सौम्य सेनगुप्ता ने सभी का आभार व्यक्त किया। तकनीकी सत्र में, प्रॉक्टर डॉ.धर्मेन्द्र प्रताप यादव ने विषय विशेषज्ञों और शोधार्थियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया।
रिपोर्ट-प्रमोद यादव/ज्ञानेन्द्र कुमार