पटवध आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। जनपद में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और अभिभावक हितैषी बनाने के लिए जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। डीएम के स्पष्ट निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक मनोज कुमार ने सभी निजी (स्ववित्तपोषित) स्कूलों के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश शुल्क विनियमन अधिनियम 2018 के तहत की गई है।
डीएम रविंद्र कुमार ने साफ कहा है कि बच्चों की शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की मनमानी और शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके निर्देशों के बाद अब जिले के सभी निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद अब सभी स्कूलों को एडमिशन से 60 दिन पहले फीस का पूरा विवरण सार्वजनिक करना होगा। फीस केवल मासिक, तिमाही या छमाही किस्तों में ही लेनी होगी। बीच सत्र में फीस बढ़ाने पर पूर्ण रोक, हर फीस के बदले रसीद देना अनिवार्य होगा। अब स्कूल किसी एक दुकान से किताब, यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। 5 साल से पहले यूनिफॉर्म बदलने पर रोक है। फीस बढ़ाने से पहले स्कूल को जिला शुल्क नियामक समिति से अनुमति लेनी होगी।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई होगी। पहली बार गलती पर फीस वापसी और 5 लाख तक जुर्माना, दूसरी बार फीस वापसी और एक लाख तक जुर्माना देना पड़ेगा।
डीएम रविंद्र कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे नियमित रूप से स्कूलों की निगरानी करें और अभिभावकों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी की सख्ती ने यह साफ कर दिया है कि अब आजमगढ़ में शिक्षा के नाम पर मनमानी नहीं, बल्कि नियम और पारदर्शिता चलेगी।
रिपोर्ट-बबलू राय