अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। इस्लामी साल का नौवां महीना रमजान उल मुबारक है जो 19 फरवरी से शुरू हुआ और आगामी 20 मार्च को खत्म होगा। साल में एक महीना रोजा अल्लाह ताला ने हर आकिल बालिग मुसलमान मर्द और औरत पर फ़र्ज़ कर दिया है। जिसको न रखने वाला सख्त गुनहगार होता है। उक्त बातें मौलाना मोहम्मद अब्दुल बारी नईमी आजमी उस्ताद मदरसा अरबिया फैज ए नईमी सरैया पहाड़ी एवं पेश इमाम जामा मस्जिद अतरौलिया आजमगढ़ ने कहीं।
उन्होंने कहा कि मरीज़ और मुसाफिर के लिए छूट है। लेकिन और दिनों में इसको पूरा करना जरूरी है। यह महीना प्रशिक्षण का है। इस महीना में मुसलमान तमाम तरह के छोटे बड़े गुनाहों से अपने आप को रोक कर अल्लाह की इबादत करने में जुट जाता है। इसी तरह साल के 11 महीनों में भी गुनाहों से अपने आप को बचाना मकसद होता है। रोजे का मकसद गुनाहों से बचना है। रोजे की हालत में जो व्यक्ति झूठ बोलना और झूठ पर अमल करना तर्क नहीं करता, रोजा उसे कोई फायदा नहीं देता है। इसलिए रोजा की हालत में झूठ गीबत चुगुलखोरी, झगड़ा, फसाद, बोगज, कीना, और तमाम तरह की बुराइयों से बचने का हमें यह सबक देता है।
इस महीने में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। और जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। शैतानों को जंजीरों में जकड़ दिया जाता है। रमजान में हर अच्छे काम का बदला फर्ज के बराबर और फर्ज का 70 फर्ज के बराबर कर दिया जाता है। इस महीना की खास इबादत दिन के रोजे के साथ-साथ रात की 20 रकात नमाजे तरावीह भी है। इस महीना में एक रात ऐसी है जो हजार महीनों से बेहतर है, रोजेदार को इफ्तार कराने में भी बड़ा सवाब है। रोजेदार को इफ्तार कराने वाले को वैसा ही सवाब मिलेगा जैसा रोजेदार को।
रिपोर्ट-आशीष निषाद