आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। गणेश चतुर्थी के अवसर पर बुधवार को धूमधाम से विघ्न विनाशक गणपति देवा की पूजा अर्चना की गई। इस दौरान चारों दिशाएं गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से गूंज उठी।
संयोगवश इस बार गणेश चतुर्थी भी बुधवार को पड़ी है जिसके चलते इस पर्व का विशेष महत्व देखने को मिला। नगर के मातबरगंज स्थित गणेश मंदिर पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का रेला लगा रहा। आस्थावानों ने गणपति के प्रिय वस्तुओं में दूर्वा घास की माला, मोदक और फल इत्यादि अर्पित कर प्रथम देव के चरणों में शीश नवाकर मंगलमय जीवन की कामना की। पूरे उत्तर भारत में स्थित गणपति मंदिरों में तीन बड़े मंदिर उत्तर प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी एवं आजमगढ़ में शोभायमान हैं। शास्त्रों व पुराणों में भी इन स्थानों का वर्णन मिलता है। अपने जिले में विराजमान गणेश देवा को मूंगा गणेश की भी उपाधि मिली हुई है। इस संबंध में मंदिर के महंत पंडित राजेश मिश्रा द्वारा बताया गया कि सायंकाल शुभ मुहूर्त में गणेश जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसके बाद आरती-पूजन के लिए दर्शनार्थियों के लिए मंदिर का पट खोला जाएगा। रात्रि बेला में शयन आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। जनपद में निवास करने वाले मराठा समाज के लोगों द्वारा भी पांच दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत बुधवार के दिन की गई। नगर के आसिफगंज मोहल्ला स्थित दामोदर कटरे में मराठा समाज द्वारा भव्य पंडाल बनाकर गणपति प्रतिमा की स्थापना की गई है। इस आयोजन के प्रमुख संजय भोंसले ने बताया कि हमारे समाज के लोगों द्वारा प्रत्येक वर्ष धूमधाम से गणेश उत्सव मनाया जाता है। प्रतिमा स्थापना के साथ ही मराठी समाज के लोग अपने घरों में भी गणपति की स्थापना कर इस महत्वपूर्ण पर्व को श्रद्धाभाव से मनाते हैं। गणेशोत्सव के अंतिम दिन धूमधाम से गणपति विसर्जन यात्रा निकाली जाती है, जिसमें महाराष्ट्र से आए ढोल वादकों का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहता है। उन्होंने बताया कि इस बार सोमवार को गणपति प्रतिमा का विसर्जन गाजे-बाजे के साथ धूमधाम से किया जाएगा।
रिपोर्ट-प्रमोद कुमार यादव