मतदान समाप्ति के बाद शुरू हुई बहस, परिणाम के साथ समापन

शेयर करे

आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। कहीं फोन पर घंटियां बजती रहीं, तो कहीं कुछ लोगों की भीड़ में चर्चा होती रही। सवाल एक ही और वह यह कि कौन जीत रहा है और कहां से किसकी हवा अच्छी दिखी। सुबह तो कुछ गनीमत, लेकिन दोपहर होने के साथ चर्चाएं तेज होने लगीं। समर्थक तर्क के साथ खुद को मजबूत बताने में पीछे नहीं हट रहे थे, लेकिन समय के साथ बहस का यह कहते हुए समापन हो गया कि चलो अब तो 4 जून को सब फाइनल ही हो जाएगा।
आजमगढ़ सदर संसदीय क्षेत्र व लालगंज सुरक्षित संसदीय क्षेत्र के 16 प्रत्याशियों का भाग्य शनिवार को मतदान के बाद ईवीएम में बंद हो गया। अब इसका फैसला चार जून को मतगणना के बाद होगा। इसी के साथ प्रशासन ने जहां राहत की सांस ली है, वहीं प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की धुकधुकी भी बढ़ गई। वह अपने सिपहसालारों से क्षेत्र में खुद की स्थिति की जानकारी ले रहे थे। इस दौरान सभी को 4 जून का इंतजार करने को विवश भी होना पड़ा। भागदौड़ के बाद कहीं-कहीं समर्थक भी आराम की मुद्रा में दिखे, तो कहीं वोटरों को घरों से बूथों तक पहुंचाने की बेताबी भी दिखी। कुल मिलाकर 16 प्रत्याशियों में दो ही के सिर पर जीत का सेहरा बंधेगा। इसके अलावा सभी को हार का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल इसे लेकर चट्टी-चौराहों पर भी सरकार बनाने व बिगाड़ने की बहस शुरू हो गई है।
जनपद के आजमगढ़ सदर लोकसभा क्षेत्र से कुल नौ प्रत्याशी मैदान में हैं। आजमगढ़ सदर से सपा के धर्मेंद्र यादव व भाजपा के दिनेश लाल यादव निरहुआ में सीधा मुकाबला माना जा रहा है। इसके अलावा छह अन्य प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं। इसी प्रकार लालगंज संसदीय सीट से भाजपा से सांसद नीलम सोनकर, बसपा से इंदू चौधरी व सपा से दरोगा प्रसाद सरोज मुख्य रूप से मैदान में हैं। इसके अलावा चार प्रत्याशी और भी चुनाव मैदान में हैं। इन सभी के भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद हो चुका है। मतदान के दौरान और समापन के बाद हर तरफ यही चर्चा होती रही कि किस प्रत्याशी के पक्ष में कितना वोट पड़ा। कहीं कोई भाजपा प्रत्याशी को प्लस बता रहा था, तो कहीं कोई सपा को। इसे लेकर बहस जारी थी। चाय की दुकानें तो नाम मात्र की खुली थीं, लेकिन उस पर भी बस सरकार बनने व बिगड़ने की बात चल रही थी। कुल मिलाकर समर्थक भी अपने-अपने स्तर से कयास लगाना शुरू कर दिए हैं, आखिर में हर तरफ इस बात की स्वीकार्यता भी दिखाई दे रही थी कि बहस से क्या फायदा है, चार जून को तो पता चल ही जाएगा कि कौन कितने पानी में है।
रिपोर्ट-प्रमोद यादव/आशीष निषाद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *