अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। अतरौलिया बाजार के लघु कृषि यंत्र व्यापारी अशोक बरनवाल द्वारा आत्महत्या का मामला परत दर परत खुलता जा रहा है। व्यापारी के परिजनों की मानें तो अशोक बरनवाल का बिजनेस जब मंदा पड़ने लगा तो वह सूदखोरी के मकड़जाल में फंस गया। हालत यह हो गयी कि अशोक द्वारा कई लोगों से पैसा उधार में लिया गया था। परिजनों ने बताया कि जिन लोगों से अशोक ने पैसा ले रखा था वह लोग अपने पैसे के लिए दबाव बना रहे थे। मगर जिन लोगों को अशोक ने पैसा दिया था वह लोग पैसा नहीं लौटा रहे थे। इस तरह लेन-देन के बीच में अशोक बुरी तरह पिस रहा था।
परिजन बताते हैं कि जिनसे अशोक पैसा लिया था उनको सूद के रूप में पैसा देते देते इनका दुकान पूरी तरह उजड़ गया जिसकी वजह से अशोक लगभग कई दिनों से काफी उलझन तथा तनावग्रस्त स्थिति में रहा करता था जिसकी वजह से परिवार में भी तू तू मैं मैं हुआ करता था। शुक्रवार को पैसे के लिए पूरा दिन इधर उधर भटकता रहा मगर पैसा ना मिलने की स्थिति में शाम को घर आया, परिजनों से बातचीत किया परिजनों के साथ खाना खाकर अपने कमरे में सोने चला गया। परिजनों ने सुबह जब दरवाजा खटखटाया अंदर से कोई आवाज नहीं आई यह स्थिति दोपहर तक बनी रही तो खिड़की से झांक कर देखा तो उसके होश उड़ गए, कमरे के छत के सहारे पाइप से अशोक की लटकती हुई लाश दिखी। पुलिस को सूचना देकर परिवार वालों ने 7 लोगों के खिलाफ लेन-देन प्रताड़ित करने को लेकर मुकदमा दर्ज कराया। घटना को लेकर अतरौलिया में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
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क्षेत्र में फल-फूल रहा है सूदखोरी का धंधा: रमाकांत मिश्र
अतरौलिया (आजमगढ़)। भारतीय जनता पार्टी के श्रम प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक रमाकांत मिश्र ने कहा कि अतरौलिया में सूदखोरी का धंधा काफी दिनों से फल फूल रहा है अगर इस पर तत्काल अंकुश नहीं लगा तो और भी व्यापारी शिकार होंगे जो अशोक की तरह खुदकुशी करने पर मजबूर होंगे। साकेत महाविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष फूलचंद यादव ने कहा कि अतरौलिया को सूदखोरी का धंधा दीमक की तरह चाट रहा है। उन्होंने कहा कि सूदखोरों की व्यापक जांच होनी चाहिए तथा अवैध रूप से सूदखोरी का धंधा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। क्षेत्राधिकारी बूढ़नपुर सिद्धार्थ तोमर रविवार को मृतक अशोक के घर पहुंचे और परिजनों से घटना की जानकारी ली। परिजनों ने जिन 7 लोगों को अशोक ने पैसे दिए थे उनके खिलाफ कार्यवाही की मांग की।
रिपोर्ट-आशीष निषाद