आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। आशंसा साहित्यिक समिति के तत्वाधान में आजमगढ़ साहित्य महोत्सव एवं लिट् फेस्ट का प्रथम आयोजन मंगलवार की शाम रोडवेज स्थित एक होटल में संपन्न हुआ। डा.प्रज्ञा सिंह लिखित पुस्तक ‘इसे कविता की तरह न पढ़िये’ का विमोचन भी हुआ। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन के साथ अतिथियों का स्वागत समिति के सदस्यों द्वारा किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में प्रो.प्रदीप कुमार शर्मा कुलपति, सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय ने कहा कि पुस्तक मानव समाज का कुशल मार्गदर्शन करती है, तथा यह महोत्सव साहित्य के लिए एक स्तंभ के रूप में कार्य करेगा। सदानंद शाही ने पुस्तक के मार्मिक पहलुओं को उकेरा, तथा महोत्सव को एक सशक्त प्रयास बताया। हिंदी कविता के प्रख्यात कवि अष्टभुजा शुक्ल ने कहा कि पुस्तक में नैतिक मूल्यों की कविता के साथ-साथ मार्गदर्शन की प्रेरणा भी है। साथ ही योगेंद्र कुमार सिंह, संतोष चौबे, अमरनाथ राय आदि के वक्तव्य के साथ पहला सत्र समाप्त हुआ।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। सभी ने अपने कुशल काव्यपाठ से लोगों का मन जीत लिया। युवा कवि अनुराग अंकुर ने ‘तुम्हारी तुम्ही से ही हर बात करते, अगर तुम मिलो तो मुलाकात करते’ सुना कर वाहवाही लूटी। अटपट ने ‘जिया परेशान बाय ना’ सुनाकर हास्य से पूर्ण किया, विजयेंद्र श्रीवास्तव ने ‘क्या घट जाता गर तुम थोड़ा और सब्र कर लेते’, डा.मुश्ताक अहमद ने ‘वो अपनी जिह्वा जब भी खोलता है, सुनाकर रोमांचित किया। साथ ही आशा यादव, जितेंद्र नूर, विदुषी अस्थाना, सिद्धार्थ, सूर्यभान आदि कवियों ने भी काव्यपाठ किया। इस मौके पर रमेश कुमार सिंह, अलका सिंह, रुद्र प्रताप सिंह, रामाधीन सिंह, डा.एके सिंह, डा.पुष्पा सिंह, डा.शुचिता, अनामिका राय, विपिन यादव आदि मौजूद रहे। आशंसा समिति की अध्यक्ष डा.प्रज्ञा सिंह ने सभी का आभार ज्ञापित किया।
रिपोर्ट-प्रमोद यादव