शिक्षक अभिमन्यु ने बदली सरकारी विद्यालयों के प्रति फैली नकारात्मक धारणा

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रानीकीसराय आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। शिक्षा वह रक्षक है, जो सपनों को साकार में बदल सकती है। शिक्षित बनो ताकि तुम दुनिया बदल सको। जज्बा कुछ कर गुजरने का हो तो सफलता भी कदम चूमती है। कुछ ऐसा ही दिखा जिले के कंपोजिट विद्यालय सरायमीर के शिक्षक अभिमन्यु यादव के अलख प्रयासों मंे जहां सरकारी विद्यालय में छात्र जाने से कतराते थे हाईटेक दौर मंे आज वहां शिक्षा की अलख एक अलग ही रंग में दिख रही है।
शिक्षक अभिमन्यु यादव और उनके शिक्षक टीम का ही प्रयास था कि सरकारी विद्यालयों के प्रति जहां हीन भावना रखते थे और जहां नामांकन कम था। अगल-बगल प्राइवेट स्कूलों का जाल फैला हुआ था वहां एक अपने कलात्मक सृजनात्मक नवाचारों से विद्यालय की दशा और दिशा ही बदल दी। शिक्षक के सृजनात्मक शैली, नवाचारों और पढ़ाने की कला ने समाज में सरकारी विद्यालयों के प्रति फैली नकारात्मक धारणा को पूरी तरीके से बदल दिया। शिक्षक के प्रयास में सरकारी विद्यालय के प्रति लोगों बनी नकारात्मक धारणा को तोड़ते हुए ‘नो एडमिशन’ तक के सफर को पूरा किया। बच्चों को आधुनिक कंपटीशन के हिसाब से तैयारी करने के लिए सुपर 30 का संचालन किया, वहीं नौनिहाल मदद बैंक के मदद से गरीब एवं अनाथ बच्चों के पूरे वर्ष भर की कॉपी किताब का प्रबंध हो जाता रहा है। आज इस विद्यालय में आम वर्ग से लेकर खास वर्ग के बच्चे दूर-दूर से शिक्षा लेने के लिए आ रहे हैं। कहा जाता है कि शिक्षक राष्ट्र का निर्माता होता है इस कथन को कंपोजिट विद्यालय सरायमीर के शिक्षक अभिमन्यु यादव ने साबित भी किया है।
इस विद्यालय मे प्रवेश के लिए छात्र प्रयासरत रहते है। आज इस विद्यालय में नगर पंचायत सरायमीर के पूर्व चेयरमैन, मार्केटिंग इंस्पेक्टर, डेंटिस्ट, तथा आर्थिक रूप से संपन्न अभिभावक भी अपने बच्चों को इस सरकारी स्कूल में भेज रहे हैं।
रिपोर्ट-प्रदीप वर्मा

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