आधुनिकता के दौर में गांवों से गायब हो रही गन्ने की मिठास

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फूलपुर आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। कभी खंडसारी और गुड़ उत्पादन के लिए प्रसिद्ध फूलपुर क्षेत्र में समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है। आधुनिकता के इस दौर में गांवों में बनने वाली गन्ने की मिठास अब खेतों और कोल्हुओं से निकलकर सड़क किनारे लगे ठेलों तक सिमट कर रह गई है।
फूलपुर तहसील क्षेत्र में गन्ना और लाल भरूवा मिर्च किसानों की आर्थिक आमदनी का प्रमुख साधन रहा है। यहां छोटे-बड़े किसान बिस्वा से लेकर बीघा तक गन्ने की बुवाई करते थे। गन्ने की पेराई कभी चीनी मिलों के साथ-साथ परंपरागत कोल्हुओं में भी होती थी। कोल्हू में पेराई के बाद बड़े कराह में गन्ने के रस को पकाकर गुड़ और भेली तैयार की जाती थी।
आज हालात यह हैं कि बाजार में गुड़ और गन्ने का रस बिक तो रहा है, लेकिन वह पुरानी संतुष्टि और स्वाद अब कम ही महसूस होता है। इसके बावजूद क्षेत्र के कुछ मेहनती किसान आज भी इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।
इसी कड़ी में फूलपुर ब्लॉक के भोरमऊ गांव निवासी अमरजीत चौरसिया पुत्र रामानंद चौरसिया, अपने परिश्रम से गन्ने की खेती कर रहे हैं। वे गुड़ बनाकर खुद भी उसका स्वाद लेते हैं और आने-जाने वालों को गन्ने का ताजा रस पिलाकर पुरानी परंपरा की मिठास को जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं।
रिपोर्ट-मुन्ना पाण्डेय

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