आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। 26वें आजमगढ़ पुस्तक मेंले के अवसर पर शुरूआत समिति द्वारा कृभको के सहयोग से ‘‘जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि प्रबन्धन एवं नागरिक दायित्व’’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में आस-पास के गांवों के किसानों एवं विद्यार्थियों की भागीदारी रही।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता डा. वीरेन्द्र कुमार यादव, असिस्टेन्ट प्रोफेसर, नार्थ ईस्टर्न हील यूनिवर्सिटी मेघालय ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के समय में फसल अवशेष प्रबन्धन आज के समय की मांग है। क्योंकि स्वस्थ समाज के लिए सतत एवं पर्यावरण हितैषी कृषि ही बेहतर विकल्प बन सकता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन में नागरिक दायित्व विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत जैसे मुल्क में जहां मुख्यतः आय का स्त्रोत कृषि रहा है वहां यह आवश्यक है कि हम पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांत को कृषि में लागू करें। इसका सबसे बेहतर विकल्प वृक्ष खेती को बढ़ावा देना है। वृक्ष खेती एक तरफ राज्य के वन क्षेत्र को भी बढ़ाने में अपना योगदान देता है तो दूसरी ओर किसान की आय में भी वृद्धि करता है।
इस अवसर पर विनोद कुमार यादव, अधिकारी, कृभको ने किसान कल्याण से जुड़ी गतिविधियों और नीम कोटेड यूरिया और अन्य उर्वरकों के फायदे बताए। उन्होने कहा कि कृभको किसानों की संस्था है और किसान कल्याण ही उसका सबसे बड़ा लक्ष्य है।
कार्यशाला सत्र का संचालन करते हुए राजीव रंजन ने कहा कि इतिहास के परिपेक्ष्य में देंखे तो कृषि विकास का इतिहास उपलब्धियों से भरा रहा है। परन्तु हर बड़ी उपलब्धि के साथ चुनौती का आना भी स्वाभाविक है। इन सभी उपलब्धियों के साथ जो चुनौतियां आती हैं वह जनता की भागीदारी से ही दूर होंगी। कार्यशाला के सफल संयोजन में इन्द्रपाल यादव, बेलाल अहमद, पूजा कुमारी, शिखा भारती सहित कृभकों के अधिकारी एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
रिपोर्ट-सुबास लाल