पटवध आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। सरकार और प्रशासन द्वारा लगातार जागरूकता एवं सख्त निर्देशों के बावजूद जनपद के कंधरापुर थाना क्षेत्र के दुल्लापार सिवान में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे सर्विस लेने से पश्चिम पराली जलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में शाम होते ही कई जगहों पर पराली को आग लगाने के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे क्षेत्र में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। सरकार ने पराली जलाने पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। ग्राम प्रधानों, लेखपालों और कृषि विभाग को भी निगरानी के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। वहीं किसानों को पराली प्रबंधन के लिए वैकल्पिक उपाय जैसेकृहैप्पी सीडर, रोटावेटर, स्ट्रॉ रिवर आदि मशीनों के उपयोग के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद कई किसान पराली जलाना बंद नहीं कर रहे। पराली जलाने से क्षेत्र में शाम के समय धुएं की मोटी परत फैल जाती है। इससे बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पराली जलने से सड़क मार्ग पर भी दृश्यता कम हो जाती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कंधरापुर पुलिस व राजस्व विभाग की टीमें लगातार गांवों में भ्रमण कर रही हैं। कई जगहों पर किसानों को चेतावनी दी गई है। जहां भी पराली जलाने की पुष्टि हुई है, वहां कार्यवाही के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक हुआ तो एफआईआर दर्ज कर सख्त जुर्माना भी लगाया जाएगा। प्रशासन ने किसानों से पराली न जलाने और वैकल्पिक प्रबंधन अपनाने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि पराली जलाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद हानिकारक है। कंधरापुर क्षेत्र में लगातार हो रही ये घटनाएँ चिंता का विषय हैं और जागरूकता तथा सख्त कार्रवाई की और अधिक जरूरत दिख रही है।
रिपोर्ट-बबलू राय