आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। अवैध ढंग से धर्मांतरण कराने के मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी पाते हुए छह-छह वर्ष के कठोर कारावास तथा प्रत्येक को 52 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने गुरुवार को दिया।
धर्म परिवर्तन कानून लागू होने के बाद यह जनपद का पहला फैसला है। अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मुकदमा अशोक कुमार यादव निवासी डीह कैथौली, थाना दीदारगंज ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि बालचंद निवासी रामपुरंदी, थाना मडियाहंू, जिला जौनपुर, गोपाल प्रजापति निवासी बालू अबीर, थाना आदमपुर, जिला वाराणसी और नीरज निवासी तिवारिया, थाना फूलपुर, आजमगढ़ हिंदुओं को बहला-फुसलाकर उनका धर्म परिवर्तन कराने की नीयत से गांव में आए हैं और लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तन करने का प्रलोभन दे रहे हैं। जब वादी मुकदमा अशोक ने 20 दिसंबर 2020 को आरोपियों को ऐसा करने से मना किया तो आरोपियों ने उन्हें अपशब्द बोला। वादी की सूचना पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज करते हुए एक सप्ताह में चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित कर दिया। इस मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी, सहायक शासकीय अधिवक्ता आनंद सिंह तथा शिवाश्रय राय ने वादी मुकदमा अशोक कुमार यादव समेत कुल चार गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी बालचंद, गोपाल प्रजापति तथा नीरज कुमार को छह-छह वर्ष के कठोर कारावास तथा प्रत्येक को 52 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना न अदा करने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
रिपोर्ट-सुबास लाल