ऊंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर श्रीकृष्ण ने की ब्रजवासियों की रक्षा

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रानीकीसराय आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। स्थानीय कस्बे के रानी पोखरा स्थित गुरुधाम पर चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में पं.श्रवण कुमार महाराज ने माखनचोर और गिरिराज पर्वत को सात दिनो तक श्रीकृष्ण के उठाये रहने, इंद्र के अहंकार तोड़ने का प्रसंग सुनाया।
भागवत पुराण में वर्णित कथा मंे गोवर्धन पूजा (गिरिराज जी) और छप्पन भोग की कथा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र का अहंकार तोड़ने से जुड़ी है। ब्रजवासियों की रक्षा के लिए कृष्ण ने सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत उठाया और इस दौरान बिना खाए रहे। आठ प्रहर के हिसाब से सात दिन के उपवास के बदले ब्रजवासियों ने उन्हें छप्पन भोग अर्पित किया।
इंद्र देव के अहंकार को तोड़ने के लिए, श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए कहा। क्रोधित होकर इंद्र ने मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। कृष्ण ने सात दिनों तक अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी की रक्षा की।
सात दिनों तक कृष्ण बिना कुछ खाए-पिए रहे। जब वर्षा रुकी, तो ब्रजवासियों ने प्रेम और कृतज्ञता स्वरूप उनके लिए छप्पन प्रकार के व्यंजन बनाए और भोग लगाया। यह भोग कृष्ण को अत्यंत प्रिय है और यह समर्पण व भक्ति का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण, माता यशोदा और ब्रज की गोपियों के साथ बालपन में माखन चुराने की लीला करते थे। वे सखाओं के साथ मिलकर ऊंचे टंगे मटकों से माखन चुराते, खुद खाते और दूसरों को भी खिलाते थे।
रिपोर्ट-प्रदीप वर्मा

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