माहुल आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। पवई विकास खण्ड के ग्राम इमामगढ़ में छः माह पूर्व सरकारी भूमि को भूमाफियाओं से कब्जा मुक्त कराकर एसडीएम फूलपुर द्वारा रोपित कराए गए पौधे कहीं दिखाई नहीं दे रहे। यही नहीं पौधों को संरक्षित करने के लिए जमीन के चारों तरफ तार से की गई बैरिकेटिंग भी गायब है जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहा है।
इमामगढ़ गांव माहुल पवई मार्ग से सटा हुआ है। इस गांव में सड़क से सटा गाटा संख्या 170 राजस्व अभिलेखों में ऊसर और बंजर खाते की भूमि है। 10 माह पूर्व इस भूमि के उत्तर दिशा में कुछ लोग जमीन की प्लाटिंग का कार्य कर रहे थे और सरकारी भूमि में मिट्टी डाल कर उसको कब्जा कर लिए थे। जिसे देख गांव के माता प्रसाद पांडेय की अगुआई में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से उक्त सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराने की गुहार लगाया था। डीएम के आदेश के अनुपालन में तत्कालीन उपजिलाधिकारी फूलपुर संत रंजन ने 17 मई 2025 को राजस्व टीम के साथ उक्त ऊसर खाते की सरकारी भूमि की मापी कराने के बाद उसको प्लाटरों के कब्जे से मुक्त कराकर 100 छायादार पौधों को अपनी मौजूदगी में रोपित कराया था। इन पौधों की देखरेख करने के लिए यहां के प्रधान दिनेश यादव को निर्देशित किया था। दो जुलाई 2025 को पुनः जिलाधिकारी के निर्देश पर उक्त भूमि पर राजस्व कार्मियों द्वारा पौधों को पशुओं से संरक्षित करने के लिए चारो तरफ पिलर लगाकर कटीले तार द्वारा घेराबंदी कराई गई थी।
माताप्रसाद पांडेय और ग्राम वासियों का कहना है कि राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से प्लाटरों द्वारा एसडीएम द्वारा लगवाए गए पिलर और तार रात के अंधेरे में गायब कर दिया गया। यही नहीं उसमें रोपित पौधों को धीरे-धीरे नष्ट कर दिया गया और पुनः उक्त सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया गया। माता प्रसाद पांडेय कहना है कि भूमाफियाओं का मनोबल इतना बढ़ा हुआ है कि रोपित पौधों को नष्ट करने के बाद अब उनके द्वारा सड़क के किनारे के पुराने पेड़ों को काटा जा रहा और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। शिकायत के बाद भी राजस्व विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।
इस सम्बन्ध में उप जिलाधिकारी फूलपुर अशोक कुमार का कहना है कि हमें इसकी जानकारी नहीं है। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा और उसमें लगे पेड़ो को नष्ट करना या काटना गलत है। जांच कराकर विधि सम्मत कार्यवाही होगी।
रिपोर्ट-श्यामसिंह