अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। रहमतों और बरकतों का मुकद्दस महीना रमजान उल मुबारक है। जिसमे अल्लाह ताला रात दिन अपने करम और बख्शिश की बारिश नाजिल करता है। पूरी दुनिया के मुसलमान 30 दिन रोजा रखकर दिन रात मिलाकर पांच वक्त नमाजों के साथ-साथ 20 रकात नमाजे तरावीह पढ़कर अल्लाह ताला की खुशी प्राप्त करते हैं। उक्त बातें मौलाना मोहम्मद अब्दुल बारी नईमी आज़मी पेश इमाम जामा मस्जिद अतरौलिया एवं उस्ताद मदरसा अरबिया फैज ए नईमी सरैया पहाड़ी ने कही।
उन्होने कहा कि ईद खुशी का वह दिन है जो रमजान की एक महीना की इबादत के बाद आता है। ईद की तैयारी में ज्यादातर लोग नए-नए कपड़े जूते चप्पल खुशबू और घरेलू सामान की खरीदारी में व्यस्त हो जाते हैं। लेकिन विशेष खुशी और सुकून तब मिलता है जब इंसान इस दिन की हकीकत की गहराई में जाता है। और अपनी खुशी को दूसरों के साथ साझा करता है। ईद की तैयारी का मकसद सिर्फ यह नहीं होता है कि हम अपनी ही जिंदगियों में खुशी पैदा करें बल्कि अपनी खुशियों को दूसरों में भी बांटे। इंसानियत की खिदमत करें, गरीब मिस्कीन को दिल से लगाए। कोई भूखा हो तो उसे खाना खिलाएं।
उन्होंने कहा कि 19 मार्च को अगर ईद का चांद नजर आया तो 20 मार्च शुक्रवार को ईद होगी। चांद नजर न आने की सूरत में 21 मार्च को ईद कंफर्म हो जाएगी।
रिपोर्ट-आशीष निषाद