बाढ़ के समय कुछ महीनों के लिए हटा ली जाएगी टेंट सिटी
वाराणसी। काशी में उत्तरवाहिनी गंगा के पूर्वी तट पर बसे तंबुओं के शहर का शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल उद्घाटन किया। रविदास घाट पर आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय जलपत्तन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी मौजूद रहे। टेंट सिटी को पूरी तरह से संवार लिया गया है और इसमें 15 जनवरी से पर्यटक ठहरने लगेंगे। टेंट सिटी बसाने में विकास प्राधिकरण के जरिये जनसुविधाओं का विकास किया गया है। पानी के लिए सरकार ने बोरिंग कराई है और बिजली के तार व सीवर लाइन बिछाई गयी है। टेंट सिटी से निकलने वाले सीवर को पंप कर के सीधे रामनगर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ले जाया जाएगा। साफ सफाई के लिए नगर निगम के लोग तैनात किए गये हैं। टेंट सिटी की सुरक्षा के लिए अस्थाई पुलिस चौकी रहेगी। बाढ़ के समय कुछ महीनों के लिए टेंट सिटी को यहां से हटा लिया जाएगा।
भारत की तपस्या की साक्षी हैं गंगा : मोदी
पीएम मोदी ने हर-हर महादेव से भाषण की शुरूआत की। कहा कि गंगा हमारे लिए सिर्फ एक जलधारा नहीं है। यह भारत की तपस्या की साक्षी है। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है कि गंगा किनारे विकास के बजाय वह पिछड़ते चले गए। इसी वजह से गंगा किनारे के लाखों लोगों का पलायन हुआ। इसीलिए हमने नमामि गंगे शुरू की। इस क्रूज में सवार विदेशी टूरिस्ट साथियों से कहूंगा कि भारत के पास सब कुछ है। इंडिया को शब्दों में डिफाइन नहीं किया जा सकता है। इंडिया को अनुभव किया जा सकता है। हिंदुस्तान के धर्म, कला, संस्कृति, पर्यावरण, नदियों और समृद्ध खानपान से रूबरू होने का सुअवसर मिलेगा। भारत आइए, ये आपकी सोच से भी परे है। कहा कि गंगा विलास क्रूज जहां से गुजरेगा वहां विकास की नई लाइन तैयार करेगा। शहरों के बीच लंबी रिवर क्रूज यात्रा के अलावा हम छोटे क्रूज को भी बढ़ावा देंगे। इसके लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। नदी जल मार्ग अब भारत का नया सामर्थ्य बनेगा। गंगा पर बन रहा राष्ट्रीय जलमार्ग पूरे देश के लिए एक मॉडल की तरह विकसित हो रहा है। ये राष्ट्रीय जलमार्ग ट्रांसपोर्ट, ट्रेड और टूरिज्म के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
विपक्षियों की ली चुटकी

पीएम मोदी ने कहा कि 2014 से पहले देश में वॉटर-वे का थोड़ा-बहुत ही उपयोग था। यह हाल तब था जबकि भारत में वॉटर-वे का पुरातन इतिहास था। 2014 के बाद हमने देश की बड़ी नदियों में जलमार्ग के विकास के लिए कानून बनाए। 2014 में 5 राष्ट्रीय जलमार्ग देश में थे। आज 24 राज्यों में 111 जलमार्गों को विकसित करने पर काम हो रहा है।