रानीकीसराय आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। स्थानीय क्षेत्र के साकीपुर गांव में चल श्रीरामकथा में कथावाचक विद्याधर दास ने कथा वर्णन में कहा यज्ञ से ही शांति आती है। त्रेत्रायुग में यज्ञ की रक्षा के लिए गुरु विश्वामित्र ने राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को ले आकर यज्ञ की रक्षा की थी।
अयोध्या में श्रीराम रामलला प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में चल रही यज्ञ और सगीतमयी रामकथा में शनिवार को ब्रज रसिक विद्याधर महराज ने कहा यज्ञ का हमेशा महत्व रहा है। वातावरण वरण शुद्धि के साथ मन भी शुद्ध होता है। गुरु बशिष्ठ के आश्रम के आस पास राक्षसों के चलते महायज्ञ सफल नहीं हो पाता था। तब गुरु ने राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को महायज्ञ की रक्षा के लिए मांगा। पहले तो राजा दशरथ अपने से दूर नहीं करना चाहते थे फिर गुरु की आज्ञा मान कर आश्रम भेज दिए। यहां पर पृथ्वी पर श्रीराम के अवतार की लीला भी होने लगी। महायज्ञ में व्यवधान कर रही ताड़का, सुबाहु राक्षस का वध किया। इनके बध के साथ ही आश्रम मंे शांति छा गई और ऋषि महायज्ञ करने लगे।
रिपोर्ट-प्रदीप वर्मा