फूलपुर आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। सरकार की मंशा के अनुरूप गांव स्तर पर ही ग्रामीणों को सभी प्रशासनिक व ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना अब भी कागजों तक सीमित नजर आ रही है। क्षेत्र के अधिकतर गांवों में बने पंचायत भवनों से पंचायत कार्यालय का नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है, जिससे ग्रामीणों को आज भी अपने छोटे-बड़े ऑनलाइन कार्यों के लिए जनसेवा केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है।
सरकार द्वारा प्रत्येक गांव में पंचायत भवन का निर्माण कर वहां पंचायत कार्यालय संचालित करने, इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने, कंप्यूटर सिस्टम, कुर्सी-मेज की व्यवस्था करने तथा पंचायत सहायक की नियुक्ति की गई थी, ताकि ग्रामीणों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, किसान रजिस्ट्री, कृषि विभाग में पंजीकरण, खसरा-खतौनी की नकल, ऑनलाइन शिकायत सहित अन्य सेवाएं गांव में ही मिल सकें। लेकिन पंचायत भवन बने पांच वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अधिकतर जगहों पर पंचायत कार्यालय केवल नाम मात्र का रह गया है।
परिणामस्वरूप ग्रामीणों को बाजार, तहसील मुख्यालय या क्षेत्र पंचायत कार्यालयों के आसपास स्थित जनसेवा केंद्रों पर जाना पड़ता है, जहां निर्धारित शुल्क से कहीं अधिक रकम वसूली जा रही है। सौ रुपये के कार्य के लिए दो सौ से तीन सौ रुपये तक खर्च करने को ग्रामीण मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि खतौनी में नाम की छोटी सी त्रुटि के कारण किसान रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है, जिससे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से वे वंचित रह जा रहे हैं। नाम संशोधन के लिए भी पहले जनसेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन कराना पड़ता है, फिर लेखपाल व कानूनगो के सत्यापन के बाद प्रक्रिया पूरी होती है। इस पूरी व्यवस्था में गरीब किसान, मजदूर और जरूरतमंद लोगों का आर्थिक शोषण हो रहा है।
इस संबंध में बीडीओ फूलपुर इशरत रोमेल ने बताया कि पंचायत कार्यालयों के नियमित संचालन के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्य में व्यस्तता के कारण गांवों का भ्रमण नहीं हो सका है। गांव में ही ग्रामीणों को सभी सुविधाएं मिले, यही सरकार और प्रशासन की मंशा है।
रिपोर्ट-मुन्ना पाण्डेय