अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। श्री नव दुर्गा पूजा समिति गोरहरपुर में विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी संगीतमयी श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। भागवताचार्य पंडित चंद्रेश जी महाराज ने अपने मधुर वाणी से राम कथा का लोगों को रसपान कराया।
उन्होंने बताया कि श्रीराम कथा से पहले, भगवान शिव ने माता पार्वती को एक कथा सुनाई थी, यह कथा, भगवान शिव ने काकभुसुंडि जी के आश्रम में स्थित नीलाचल पर हंस रूप में जाकर सुनी थी। इसके बाद, भुसुंडि जी ने हंस रूपी भगवान शिव को यह कथा सुनाई थी। सबसे पहले रामायण भगवान शंकर ने देवी पार्वती को सुनाई थी। वहां पर उस कथा को एक कौवे ने सुना जो आगे जाकर कागभुशुंडि बने। कागभुशुंडि ने ये कथा ऋषियों और गरुड़ को सुनाई थी। वाल्मीकि रामायण उसके बाद लिखी गयी। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान महादेव ने देवी सती से विवाह किया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता सती का विवाह हरिद्वार के दक्ष मंदिर में हुआ था। सती ब्रह्मा के पुत्र दक्ष की पुत्रियों में से एक थीं। श्री राम कथा के उपरांत विशाल भंडारे का भी आयोजन भी किया गया है जिसमें हजारों की संख्या में पहुंच कर लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं। कथा समापन एवं पूर्णाहुति 11 अक्टूबर को होगी तथा भंडारा एवं प्रसाद वितरण 13 अक्टूबर को किया जाएगा।
रिपोर्ट-आशीष निषाद