निजामाबाद आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। विधान परिषद में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के पुर्नयोजित चिकित्सकों की आयु सीमा 65 से 70 वर्ष करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इससे चिकित्सकों की कमी भी दूर होगी और राज्य चिकित्सा सेवा को गतिमान करने में सुविधा होगी।
श्री पाठक ने कहा कि राज्य में प्रत्येक व्यक्ति को चिकित्सा उपलब्ध हो इस मंशा से कार्य में जुटी योगी सरकार लगातार नये कीर्तिमान स्थापित कर रही है। वन डिस्ट्रिक वन मेडिकल कॉलेज सहित राज्य में आमजन को बेहतर चिकित्सा मिल पाये इसलिए अस्पतालों के उच्चीकरण के भी कार्य हो रहे है। ऐसे में चिकित्सकों की आवश्यकता भी बढी है। सरकार ने चिक्तित्सकों की सेवा आयु 62 वर्ष से बढाकर 65 वर्ष कर दी है। किन्तु पुर्नयोजित चिकित्सकों की आयु सीमा 62 से 65 वर्षीय है। वर्तमान में आयोग से नये विशेषज्ञ चिकित्सकों का प्रदेश की सेवा में कम आने के कारण चिकित्सकों की कमी हो रही है। सरकार ने समस्त मेडिकल कॉलेज पुर्नयोजित चिकित्सकों की तैनाती की आयु सीमा 70 वर्ष कर दी है। क्योकि सेवानिवृति की आयु ही 65 वर्ष है तो सहज स्वाभाविक है कि सेवानिवृति के बाद ही कोई चिकित्सक पुर्नयोजित की आपेक्षा करेगा। क्योकि पूर्व निर्धारण है 62 से 65 वर्ष इसलिए सेवानिवृत्त चिकित्सकों का पुर्ननियोजन नहीं हो पा रहा है। केन्द्र सरकार की सीजीएसएच अथवा राज्य सरकार के बीमा चिकित्सालय एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश से 70 वर्ष की आयु सीमा के पुर्ननियोजन हुए। जब मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा दी गई तो बाकी स्थानों पर भी निश्चित तौर पर इसको भी लागू किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट-वीरेन्द्रनाथ मिश्र