आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। लोकसभा उपचुनाव में पराजय के बाद विधायकों में बढ़ी ऊर्जा कहें या फिर संगठनात्मक रणनीति, लेकिन अठरहवीं लोकसभा चुनाव में जिले की दोनों सीटों पर सपा प्रत्याशियों की सफलता से यही लगता है कि उपचुनाव में पराजय के बाद सभी विधायक जाग उठे थे और शायद इसी का नतीजा रहा कि सपा ने दोनों लोकसभा सीटों को जीतकर नया इतिहास रच दिया। इससे पहले सपा ने अपने उदय के बाद वर्ष 1996 में लोकसभा चुनाव में एंट्री तो की, लेकिन कभी दोनों सीटों पर कब्जा नहीं जमा सकी थी।
थोड़ा पीछे चलें तो वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने जब आजमगढ़ सीट से इस्तीफा दिया, तो उप चुनाव की नौबत आ गई। उप चुनाव में कभी अखिलेश के हाथों डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों से हारने वाले दिनेश लाल यादव निरहुआ को भाजपा ने दोबारा मौका दिया, तो सपा ने परिवार के धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतारा। इस चुनाव में निरहुआ ने मात्र 8679 मतों के अंतर से धर्मेंद्र यादव को परास्त कर दिया। तब पांच विधायकों की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक हो गया था।
आजमगढ़ सदर में सपा के दुर्गा प्रसाद यादव को सर्वाधिक 100813 मत हासिल हुआ था। इसके अलावा सगड़ी में सपा के हृदय नरायन सिंह पटेल को 83093, गोपालपुर में सपा के नफीस अहमद को 84401, मुबारकपुर में सपा के अखिलेश यादव को 80726 तथा मेंहनगर (सुरक्षित) सीट पर सपा की पूजा सरोज को 86960 मत मिला था।
वहीं उपचुनाव में विधानसभावार पड़े वोटों पर नजर डालें तो गोपालपुर में सपा को सर्वाधिक 61150 वोट हासिल हो सके। सगड़ी में 53059 वोट के साथ सपा दूसरे स्थान पर रही। मुबारकपुर में तो सबसे ज्यादा 67849 वोट हासिल कर बसपा पहले नंबर पर थी, जबकि 58684 वोटों के साथ सपा को दूसरा स्थान मिला था। आजमगढ़ सदर के नौ बार के विधायक दुर्गा प्रसाद यादव के रहते सपा को मात्र 68579 मत मिला और वह दूसरे नंबर पर थी। मेंहनगर की विधायक पूजा सरोज भी अपने 86960 वोटों को सहेज नहीं पाईं और यहां भी भाजपा जीत गई। इस प्रकार गोपालपुर में सपा और मुबारकपुर में बसपा के अलावा तीन विधानसभा सीटों पर भाजपा भारी साबित हुई थी।
दूसरी ओर लोकसभा चुनाव में विधानसभावार पड़े वोटों पर गौर करें तो सभी 10 विधानसभा चुनाव में पड़े वोटों से कहीं ज्यादा वोट समेटने में सपा के विधायक कामयाब रहे।
रिपोर्ट-सुबास लाल