अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। ग्रामीण पुनर्निर्माण संस्थान द्वारा कृषि कल्याण केंद्र बांसगांव, अतरौलिया में विश्व जल दिवस के अवसर पर “जल है तो कल है” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जल संरक्षण और उसके महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य अतिथि कृषि वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र कुमार गौतम तथा डॉ. आदित्य कुमार रहे।
राजदेव चतुर्वेदी ने कहा कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का मूल आधार है। पृथ्वी पर सभी जीवों का अस्तित्व जल पर निर्भर है और मानव शरीर का लगभग 70 प्रतिशत भाग जल से बना है, जो इसकी महत्ता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल संकट एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। देश के कई क्षेत्रों में लोगों को पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। नदियों का सूखना, तालाबों का समाप्त होना और भूजल स्तर का लगातार गिरना चिंता का विषय है।
डॉ. महेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि जल संकट का मुख्य कारण पानी का अत्यधिक और असंतुलित उपयोग है। दैनिक जीवन में लापरवाही से पानी की बर्बादी हो रही है, वहीं जल प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। फैक्ट्रियों का अपशिष्ट, प्लास्टिक कचरा और रासायनिक पदार्थ जल स्रोतों को दूषित कर रहे हैं।
डॉ. आदित्य कुमार ने कहा कि कृषि क्षेत्र में जल का सबसे अधिक उपयोग होता है, इसलिए किसानों को ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाना चाहिए, जिससे पानी की बचत संभव है। अंत में सभी लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संकल्प दिलाया गया।
रिपोर्ट-आशीष निषाद