फूलपुर आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ फूलपुर नगर की प्रताप प्रभात शाखा पर महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती पर वैचारिक चर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ स्वयंसेवक अधिवक्ता हरिश्चंद्र बरनवाल ने महर्षि दयानंद के जीवन और विचारों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि फाल्गुन कृष्ण दशमी, 12 फरवरी 1824 को गुजरात प्रांत के टंकारा में मूल नक्षत्र में बालक मूलशंकर का जन्म पिता कर्षण तिवारी एवं माता यशोदा बाई के घर हुआ था। उनके आध्यात्मिक गुरु स्वामी विरजानंद दंडी ने उन्हें ‘दयानंद सरस्वती’ नाम प्रदान किया। स्वामी दयानंद सरस्वती आधुनिक भारत के प्रखर चिंतक, समाजसेवी, सुधारक और वेदों के महान भाष्यकार थे।
उन्होंने ‘वेदों की ओर लौटो’ का आह्वान किया तथा आर्य समाज की स्थापना की। समाज में व्याप्त कुरीतियों बाल विवाह, सती प्रथा, ऊंच-नीच का भेदभाव और छुआछूत का उन्होंने प्रबल विरोध किया। वे सभी को शिक्षा के अधिकार के समर्थक थे। उन्होंने ‘स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का ध्येय वाक्य दिया, जिसे आगे चलकर लोकमान्य तिलक ने जन-जन तक पहुंचाया। उनके विचारों से प्रेरित होकर अनेक स्वतंत्रता सेनानी स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए। उनके विचार आज भी समाज को जागृत और मार्गदर्शित करते हैं।
इस अवसर पर सूर्यबली यादव, रामकृष्ण राय, अतुल जायसवाल, अनिल गुप्ता, कमल जायसवाल, रामप्यारे मौर्य, दीपांशु बरनवाल, शैलेन्द्र प्रजापति, अरविन्द कुमार आदि उपस्थित रहे।
रिपोर्ट-मुन्ना पाण्डेय