विधिविधान पूर्वक हुआ सामूहिक पिण्डदान

शेयर करे

आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। रविवार को श्रद्धालुओं ने घरों तथा नदी व सरोवरों के किनारे पिंडदान कर श्रद्धा पूर्वक पितरों को विदा किया। इस मौके पर आस्थावान लोग नदी तट, सरोवरों के किनारे तथा अपने घरों पर यथाशक्ति अनुष्ठान कर पितृपक्ष का कार्यक्रम संपन्न किया।
पित्र पक्ष के अंतिम दिन रविवार को तमसा नदी के तट पर स्थित शहर के गौरीशंकर घाट पर जुटे आस्थावानों ने कर्मकांड के ज्ञाता पुरोहित द्वारा कराए गए वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धा पूर्वक पिंडदान किया। नदी तट पर स्थित घाट की सीढ़ियां पिंडदान करने वालों से खचाखच भरी हुई थीं। सुबह से ही लोग पिंडदान की पूरी तैयारी कर आवश्यक सामग्री के साथ नदी तट पर पहुंचने लगे थे। वहां मौजूद पुरोहित द्वारा बारी-बारी से लोगों को कतार में बैठाकर पिंडदान से संबंधित अनुष्ठान कराया जा रहा था। तमाम लोग अपने कुल पुरोहित के माध्यम से त्रिपिंडी एवं नारायण बलि का अनुष्ठान कराते हुए अपने पितरों को स्मरण किए। श्रद्धालुओं ने पिंडदान क्रिया संपन्न कराने के बाद यथाशक्ति पुरोहित को दान देकर आशीर्वाद लिया और अपने घर पहुंचे।
रानीकीसराय प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे के रानी पोखरा पर रविवार को सामूहिक पिंड दान श्राद्ध कर्म किया गया। इस दौरान ग्रामीण को भारी भीड़ रही जो सुबह से दोपहर तक चलता रहा। आचार्य पं.पवन पांडेय द्वारा दस वर्षों से सामूदायिक रुप से श्राद्ध कर्म पिंड दान का क्रम चल रहा है। इसमे कस्बे के अलावा आस पास के गावो के लोग भी रहे। आचार्य ने कहा इस सामूहिक श्राद्ध कर्म मे विधि कर्माे के अनुसार हो जाता है। पूर्वजों की आत्मा शांति हेतु श्राद्ध कर्म आवश्यक है। वैसे क्षेत्र के कई पोखरे और नदी तट के किनारे भी लोग श्राद्ध कर्म में लगे रहे।
रिपोर्ट-प्रमोद कुमार यादव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *