अतरौलिया आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। पूर्वांचल के ऐतिहासिक मेले गोविंद साहब धाम पर गोविंद दशमी के दिन पवित्र सरोवर में लाखों लोगों ने डुबकी लगाई। इस दौरान हल्की हवा के झोंके भी थे लेकिन लोगो के दिलो में श्रद्धा की ज्योति ठंडी नहीं हुई कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
आजमगढ़ अम्बेडकर नगर की सीमा पर स्थित गोविंद साहब धाम पर शुक्रवार की आधी रात ख़त्म होते ही शनिवार को हर किसी के कदम चल पड़े थे गोविन्द सरोवर की ओर डुबकी लगाने को। वहीं शनिवार की भोर होते होते गोविन्द साहब के जयकारे से पूरा धाम गूंज उठा। लोग सरोवर में स्नान के बाद बाबा की समाधि की ओर हाथ में प्रसाद और मन में मन्नत लेकर पहुंचते रहे। किसी के चेहरे पर कहीं से भी कोई सिकन नहीं नजर आ रही थी। कुछ लोगों ने आधी रात के बाद से ही स्नान करना शुरू कर दिया लेकिन अधिकतर लोगो ने ब्रह्म मुहूर्त में ही सरोवर में डुबकी लगायी। मेला परिसर में क्षेत्राधिकारी सहित मेला प्रभारी पुलिस बल के साथ लगातार आक्रमण लगा रहे थे, और इस तरह गोविंद साहब मेले का 233वां स्नान भी समाप्त हुआ।
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श्रद्धालुओं ने चढ़ाई कच्ची खिचड़ी व लाल गन्ने
अतरौलिया (आजमगढ़)। श्रद्धालुओ ने गोविन्द साहब दरबार में प्रसाद के रूप में चावल व उर्द के दाल की कच्ची खिचड़ी तथा लाल गन्ना चढ़ाया। स्नान और बाबा की समाधि पर शीश झुकने के बाद भीड़ मेले में पहुची। मेले में खजला, लाल गन्ना, लकड़ी निर्मित सामान, दुधारू पशु, घोड़े तथा बच्चों के मनोरंजन आदि के साथ ही सामानों की जमकर खरीदारी हुई। जगह जगह क्लोज सर्किट कैमरा लगा था। मेला प्रभारी निरीक्षक कृपा शंकर यादव मेला परिसर तथा अतरौलिया प्रभारी निरीक्षक प्रमेंद्र कुमार सिंह अतरौलिया से अमडी मोड़ तक की यातायात ब्यवस्था पर नजर बनाए हुये थे।
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एक दाना प्रसाद के लिए जमे रहते हैं लोग
अतरौलिया (आजमगढ़)। गोविन्द साहब मेले में हर कोई पहुंचता तो है लेकिन उनकी सोच अलग अलग होती है। कोई मेले के बहाने खरीदारी करने, तो कोई स्नान व पूजा के बाद अपने घर का रास्ता पकड़ता है। कई जिलो से आने वाले लोग बाबा की समाधि पर शीश झुकाने के बाद भी तब तक वहां से नही हटते जब तक समाधि के गुम्बद से सरक कर गिरा एक दाना प्रसाद उनके हाथ तक नहीं पहुच जाता है। समाधि के चारो तरफ खड़े लोगो ने बताया बहुत से लोग ऐसे होते है जो समाधि तक नही पहुच पाते है तो गुंबद के ऊपर से ही प्रसाद चढ़ा देते है जो गिर कर नीचे आता है। वही प्रसाद जिस किसी के हाथ में आ जाता है उसे गोविन्द साहब की विशेष कृपा मानी जाती है।
रिपोर्ट-आशीष निषाद