विलुप्त होती कजरी को संजोने के लिए हरिहरपुर घराना कटिबद्ध-राजेश मिश्र

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आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। ऐसा लगता है कि मानव को जब स्वर और शब्द मिले, और जब लोक जीवन को प्रकृति का कोमल स्पर्श मिला होगा, उसी समय से लोकगीत कजरी की उत्पति हुई हैं लेकिन बदलते परिवेश के बीच कजरी विधा विलुप्त होती जा रही थी, लेकिन हरिहपुर घराना संगीत संस्थान ने संगीत की इस प्राचीन विधा को सदैव संजोने और उन्नति के शिखर तक पहुंचाने तक कटिबद्ध है। उक्त बातें कजरी महोत्सव हरिहरपुर घराना संगीत संस्थान के अध्यक्ष राजेश मिश्र ने गुरूवार को नगर के पहाड़पुर स्थित भारतीय संगीत कला केन्द्र पर आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान कही।
कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए सचिव, निदेशक अजय मिश्र ने बताया कि तीन दिवसीय हरिहरपुर कजरी महोत्सव का आयोजन हरिहरपुर संगीत अकादमी हरिहरपुर घराना में 27 अगस्त से किया गया है। कजरी महोत्सव का शुभारंभ सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ व भोजपुरी सिने-तारिका आम्रपाली दुबे द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। जिसमे कजरी, शास्त्रीय गायन, तबला, सोलो सितार युगल बंदी व मुम्बई, लखनऊ, दिल्ली, गोरखपुर सहित पूर्वी शहरों के कलाकार शिरकत करेंगे और कजरी गीत, भजन, गजल व लोकगीत की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। इस अवसर पर कोषाध्यक्ष उदयशंकर मिश्र, अनुराग गुप्ता, प्रवीण मिश्र, हृदय मिश्र, दीपराज मिश्र, विशाल मिश्र, दुर्गेश मिश्र, मोहन मिश्र, आदर्श मिश्र, नन्दलाल त्रियोगी सहित आदि सहयोगी मौजूद रहे।
रिपोर्ट-प्रमोद कुमार यादव

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