आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। भारत में सबसे अधिक आम उत्पादन करने वाला राज्य उत्तर प्रदेश है, तो दूसरे पर आंध्र प्रदेश और तीसरे पर कर्नाटका में सबसे अधिक आम का उत्पादन होता है। आम के बाग लगाने का बहुत ही उचित समय चल रहा है। जून से सितंबर तक आम के बाग लगाने का उचित समय है।
यह जानकारी आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा के उद्यान वैज्ञानिक डॉ विजय कुमार विमल ने दी। बताया कि फल के बागान लम्बे समय के लिए होते हैं और फल आने में 4 से 5 साल तक लग जातें हैं। इन सालों में पौधों के बीच खाली पड़ी जमीन में फसल या सब्जी का उत्पादन कर भी आय प्राप्त कर सकतें हैं। बाद में छाया पसंद करने वाली सब्जियां जैसे अरवी, सूरन, हल्दी भी लगाकर दोहरी आय प्राप्त कर सकतें हैं।
बाग लगाने के लिए दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है और बाग लगाने के पहले मिट्टी की जाचं अवश्य करा लें। सिंचाई की समुचित व्यवस्था, यातायात के साथ बाजार की निकटता बहुत आवश्यक है, जिससे फल आसानी से बेचा जा सके। अनुभवी मजदूर का भी होना आवश्यक है। बाग लगाने के लिए गड्ढा एक घनमीटर आकार का बनाना चाहिए। गड्ढा की खुदाई के समय ध्यान रखें कि मिट्टी निकालते समय ऊपर की मिट्टी अलग और नीचे की मिट्टी अलग रखें और 15 दिन धूप में छोड़ दें, ताकि हानिकारक कीट के अण्डे व लार्वा मर जाए। फिर गड्ढे को भरते समय 20 से 30 किलो सड़ी गोबर की खाद में 100 ग्राम सुपर फास्फेट, 100 ग्राम पोटाश 50 ग्राम नीम की खली और उपर की मिट्टी नीचे भरें। प्रति गड्ढा 250 ग्राम फेनवैलरेट या मिथाइल पैराथियान का पाउडर डालना चाहिए और नीचे की मिट्टी उपर भरनी चाहिए। गड्ढा भरते समय इसकी उपरी सतह 15 सेमी ऊपर रहनी चाहिए। बाग लगाने से पहले अच्छी प्रजातियों जैसे दशहरी, गौरजीत, मल्लिका, आम्रपाली, स्वर्णरेखा, चौंसा, लगड़ा आदि का चयन अवश्य करें। आम की पौध लगाने के समय पौधे की दूरी जैसे सामान्य आम के बागान के लिए 10×10 मी एवं सघन बागवानी कि लिए 5×5 मीटर रखी जाती है। आम की बाग लगाने की वर्गाकार विधि सबसे अच्छी है, इसके अलावा आयताकार, षष्टभुजाकार, त्रिभुजाकार, पूरक विधि से भी बाग लगाये जाते हैं। पौध लगाने से पहले पिण्ड को थोड़े से पानी में रखें जिससे उसमें की हवा निकल जाए। लगाने के बाद अच्छी तरह दबा दें व उसके बाद सिंचाई अवश्य करें। बाद में कलम के नीचे वाली शाखाओं को हटा दें। साथ में यह भी ध्यान दंे कि बाग में जल निकासी की व्यवस्था अवश्य हो। इन सभी विधि व सावधानियों को ध्यान में रखते हुए बागवानी करें तो बागवान अच्छी आय प्राप्त कर सकतें हैं।
रिपोर्ट-सुबास लाल