फूलपुर आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। सरकार द्वारा जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए बनाए गए नए नियम क्षेत्रीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रमाणपत्रों के लिए ब्लाक से लेकर तहसील मुख्यालय पर क्षेत्रीय लोगों का जमावड़ा लग रहा है। इसमें मुस्लिम लोगों की भीड़ अधिक दिख रही है।
जून जुलाई माह से बच्चों का विद्यालयों में प्रवेश को लेकर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का सिलसिला शुरू हुआ था। चार माह बीत जाने के बाद भी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का सिलसिला बन्द नही हो सका है। खासकर मुस्लिम वर्ग में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की होड़ मची है। अल्पसंख्यक समुदाय के एक वर्ष या जन्म लिया बच्चे सहित बुजुर्ग भी अपना जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में लगे हैं। जिसके लिए भारी भरकम रकम दलालों पर खर्च करने में लगे हैं। जिसके लिए अधिकारियों के पूछने पर इधर उधर आधार बैक आदि में नाम त्रुटि बनवाने सुधारने की बात कहते कहते एनआरसी की बात बताने लगे हैं। एनआरसी का भय समझे या अज्ञानता का कारण बहुतायत संख्या में अल्पसंख्यक वर्ग के लोगांे को तहसील ब्लाक पर देखा जा सकता है। अब तो अल्पसंख्यक महिलाओं का भी आगमन शुरू हो गया है। जन्म प्रमाण पत्र के लिए प्रतिदिन पचास पचपन आवेदन फार्म तहसील से ब्लाक आ रहे हैं। जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आख्या रिपोर्ट लगवाने की व्यवस्था सुलभ सरल हो इसके लिए खण्ड विकास अधिकारी द्वारा एक लिपिक को नियुक्त किया है। वही एडीओ पंचायत द्वारा तीन सफाईं कर्मी की तैनाती कर दी गयी है। जो गांव में सुबह से साफ सफाई कर ग्यारह बजे पँचायत कार्यालय पर जन्म प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूर्ण कराने में लगे है ।फिर भी दिन प्रत्तिदिन भीड़ बढ़ती जा रही।
रिपोर्ट-मुन्ना पाण्डेय