जलवायु के अनुकूल प्रजातियों का चयन करें किसान

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आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। मौसम के बदलते मिज़ाज एवं विपरीत परिस्थितियों को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा उन्नतशील व जलवायु अनुकूल प्रजातियों एवं तकनीकों की खोज की जा रही है। संसाधन संरक्षण तकनीकी को किसानों के खेत में लागू करने के लिए सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, जीरोटिल ड्रिल आदि मशीनों से रबी में गेंहू, चना, मटर, मसूर और सरसों की बोआई करने से किसानों की लागत में कमी के साथ ही साथ फसलों की उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। उक्त आशय की जानकारी आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा, आजमगढ़ के प्रभारी अधिकारी व सह अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय प्रो.डीके सिंह ने दी।
केन्द्र की वैज्ञानिक डॉ.अर्चना देवी ने बताया कि अच्छे उत्पादन के लिए अच्छे बीज का चयन करना अत्यंत जरूरी है। जनपद आजमगढ़ में गेंहू की बोआई का समय 25 अक्टूबर से 10 दिसम्बर तक का होता है। विभिन्न प्रजातियों का चयन करके समय से बोआई करने पर किसानों को अधिक लाभ होगा। यदि किसी कारणवश गेंहू की बोआई में विलम्ब होता है तो हलना प्रजाति का चयन करें।

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सभी बीजों का शोधन आवश्यक
आजमगढ़। फसल सुरक्षा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बोआई से पूर्व सभी बीजों का शोधन अवश्य करना चाहिए। इससे जमाव में वृद्धि के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता का भी विकास होता है। रासायनिक उपचार हेतु गेंहू, चना, मटर, मसूर, सरसों आदि बीजों के लिए प्रति किग्रा बीज हेतु 2 ग्राम थीरम तथा 2.5 ग्राम कार्बेन्डाजिम अथवा 2.5 ग्राम कार्बाेक्सिन दवा का प्रयोग करना चाहिए। जैविक उपचार हेतु 8-10 ग्राम ट्राईकोडर्मा जैव फफूंदनाशी का प्रयोग करें।
रिपोर्ट- प्रमोद यादव/ज्ञानेन्द्र कुमार

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