आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। हे मां मुझे आपकी पूजा का विधान नहीं मालूम है, जितना ज्ञान था उसके अनुसार आपकी आराधना की। मां अगर कोई गलती हुई हो, तो उसे क्षमा करना और हमेशा मेरे और परिवार के ऊपर अपनी कृपा बनाए रखना। इस तरह क्षमा याचना के साथ शुक्रवार को भक्तों ने नए अन्न से बने पकवान, वस्त्र, पुष्प, नारियल, चुनरी आदि अर्पित कर वासंतिक नवरात्र के आखिरी दिन देवी मां को विदाई दी। घरों से लेकर मंदिरों में हवन कुंड में आहुति देकर व्रत पूरा किया। हवन कुंड के धुएं से पूरा वातावरण सुवासित हो उठा। इस दौरान कहीं आरती, तो कहीं घंट-घडिय़ाल की ध्वनि के बीच भक्तों ने मां के जयकारे लगाए। उधर, रामनवमी के पहले महिलाओं ने रातभर जागकर तरह-तरह के पकवान बनाए। रात में पूजन के साथ कलश स्थापित किया।
पुष्प माला के साथ नए अन्न से बने पकवान व नई साड़ी व चुनरी चढ़ाकर देवी मां से मंगलमय जीवन का आशीर्वाद मांगा। दिन निकलने के पहले घर के बाहर महिलाओं ने बाट-पूजन किया। उसके बाद नजदीक के मंदिरों में जाकर देवी को प्रसाद, धार, लौंग आदि अर्पित किया। शहर के मुख्य चौक स्थित दक्षिणमुखी देवी दरबार, बड़ादेव स्थित दुर्गा-हनुमान मंदिर में सामूहिक हवन की व्यवस्था होने से उन लोगों को आसानी हुई, जिनके घरों में कलश स्थापना और दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं बैठाया गया था। निजामाबाद प्रतिनिधि के अनुसार-नगर से सटे भैरवपुर गांव स्थित मां शीतला धाम पर नवरात्र के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री का दर्शन-पूजन किया। दरबार मे भोर से ही हलवा-पूरी चढ़ाने के लिए भक्तों के पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था।
फूलपुर प्रतिनिधि के अनुसार मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ घर घर हवन पूजन किया गया। रात्रि जागरण के साथ महिलाओं ने तरह तरह के व्यंजन बनाए। भोर में बांट पूजे और देवी मन्दिर जाकर मत्था टेका। पूजन अर्चन हवन किया और परिवार के सुख समृद्धि की मंगल कामना की। नौ कन्याओं का पांव धुलकर एवं चुनरी ओढ़ा कर पूजा की। चना गुड हलवा पूड़ी आदि व्यंजन खिलाए। यथा शक्ति उपहार दिया। इस अवसर पर ग्राम देवता, मा भवानी, माता बुढ़िया, माता काली, आदि स्थानों पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक थी। हवन के सुगन्ध व माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो गया।