मौसम में नमी से माहू रोग से सरसों की फसल होती है बर्बाद

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फूलपुर आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। वर्तमान समय में सरसों की फसल में फूल निकलने के साथ ही कलियां भी बन रही हैं। इधर कई दिनों से मौसम के करवट बदलते ही कोहरे का प्रकोप चल रहा है। इस समय दलहनी और तिलहनी फसलों की देखभाल की नितांत आवश्यकता है। हर साल माहू के रोग से किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ता है।
सहायक विकास अधिकारी कृषि पवई कुलदीप यादव ने बताया कि कोहरे के समय हल्की सिंचाई से कोहरे के प्रभाव से बचाया जा सकता है। फूल आने और कलियां बनने के समय जिंक सल्फेट का छिड़काव करना चाहिए। कोहरे के बाद धूप निकलने पर छिड़काव करना ठीक रहता है। बुआई के समय जिंक और सल्फर युक्त उर्वरकों का प्रयोग करने से फूल और कली अच्छी बनती है। घने कोहरे और पाले से बचाव के लिए सरसों की फसल में एनपीके और बोरान का छिड़काव किया जाना चाहिए। इससे फूल नहीं गिरेंगे और फंगस और सफेद रोग से भी बचाया जा सकता है। इसके अलावा कलियों में दाना भराव में मदद मिलती है। सल्फर का प्रयोग फंगस जनित रोगों को नियंत्रित करता है। वहीं अरहर की फसल को दिसंबर महीने में फली छेदक रोगों से बचाने का समय होता है। इस समय फली छेदक और उकठा रोग अरहर की फसल को खराब करते हैं। फली छेदक रोग से बचाने के लिए डैमेथोएट पानी में मिलाकर किसान छिड़काव करें। वहीं उकठा रोग से बचाने के लिए कैप्टान रसायन को पानी में मिलाकर छिड़काव कर अरहर की फसल को बचाने के साथ ही अच्छा उत्पादन किसान कर सकते हैं।
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सरसों की फसल में माहू (अफिड) कीट एक गंभीर समस्या है। यह पौधों का रस चूसकर फसल के उत्पादन को नुकसान पहुंचाता है। इससे सरसों का उत्पादन काफी प्रभावित होता है। ऐसे में सरसों की फसल को माहू से बचाना बहुत जरूरी है। इसके लिए किसान रसायन के साथ ही फसलों के रोगों का जैविक और प्राकृतिक तरीके से इलाज और उपचार कर सकते हैं। चन्द्रकेश यादव, सहायक विकास अधिकारी कृषि फूलपुर।
रिपोर्ट-मुन्ना पाण्डेय

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