मार्टिनगंज आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। पितृ पक्ष (श्राद्ध) के चलते बाजार से ग्राहकों की रौनक गायब हो चुकी है। ग्राहकों से खचाखच रहने वाला बाजार ग्राहकों की बाट जोह रहा है। जिन दुकानदारों को दोपहर के समय सांस लेने तक की फुर्सत नहीं होती थी, वह दुकानदार अब ग्राहकों का इंतजार करते हुए नजर आते हैं। धंधा इस कदर मंदा हो गया है, जिसे सोचकर दुकान मालिक सिहर रहे हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी उन दुकानदारों की बढ़ गई है, जिन्होंने किराये पर दुकानें ली हुई हैं। हालात यह हैं कि दुकान का किराया निकलने की भी उम्मीद नहीं दिख रही है। किसी-किसी दिन तो बोहनी तक नहीं होती है। ऐसे में अब दुकानदारों को नवरात्र पर्व का इंतजार है। पौराणिक मान्यता है कि जब श्राद्ध शुरू होते हैं तो उस दौरान कोई भी नई चीज या वस्तु खरीदना शुभ नहीं माना जाता है। इसके चलते लोग श्राद्ध पक्ष के दौरान वस्तुओं की खरीद-फरोख्त करने से परहेज करते हैं। इसका असर व्यापार पर दिख रहा है। चाहे इलेक्ट्रानिक सामान हो, कपड़ा या गिफ्ट आइटम या सोने तथा चांदी के गहने सभी दुकानों पर सन्नाटा है। ऐसे में दुकानदारों को इंतजार है कि किसी तरह पितृपक्ष का समय निकले और नवरात्र महोत्सव शुरू हो, जिससे दुकानों की रौनक फिर बढ़ सके।
माता अष्टभुजी मंदिर के पुजारी ज्योतिष के ज्ञाता कर्मकांड विशेषज्ञ पंडित गिरजा प्रसाद पाठक ने बताया कि इस साल 21 सितंबर को अमावस्या का श्राद्ध एवं तर्पण अंतिम होगा। 22 सितंबर से नवरात्र शुरू हो जाएंगे। ऐसा पितृ पक्ष के दौरान कुछ समय के लिए शुभ कार्यों को टाला जाता है। पितृ पक्ष में पितरों से निमित्त पिंडदान की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।
रिपोर्ट-अद्याप्रसाद तिवारी