“सूफीवाद और महिला शिक्षा” पर हुई परिचर्चा

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आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। शिब्ली नेशनल कॉलेज के प्राचार्य प्रो.अफसर अली के सहयोग और इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो.अलाउद्दीन खान के मार्गदर्शन में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पूर्व प्रो.अज़ीज़ुद्दीन हुसैन ने सूफीवाद और महिला शिक्षा पर इतिहास विभाग के छात्र-छात्राओं से संवाद किया।
उन्होंने कहा कि सूफीवाद इस्लाम का आध्यात्मिक इतिहास है, जिसने भारत में नैतिकता, अध्यात्म, समानता और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि सूफियों की खानकाहें (आश्रम) ज्ञान, प्रशिक्षण और समानता के केंद्र थीं, जहां पुरुषों और महिलाओं दोनों को आध्यात्मिक शिक्षा की अनुमति थी। उन्होंने बताया कि दिल्ली सल्तनत और मुगल शासकों ने भी महिलाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन दिया। शाही घरानों की महिलाएं धार्मिक और साहित्यिक शिक्षा में गहरी रुचि रखती थीं। सूफियों की सरपरस्ती में भले ही महिलाओं की शिक्षा शाही और उच्च वर्ग तक सीमित रही हो, लेकिन इसका बौद्धिक और वैचारिक स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ा। ब्रिटिश काल में जब आधुनिक शिक्षा आंदोलन उभरा, तो सूफीवाद की आध्यात्मिक सहिष्णुता ने उस राह को आसान बनाया। सर सैयद अहमद खान, मौलाना अशरफ अली थानवी और इमदादुल्लाह महाजिर मक्की ने महिलाओं की नैतिक, धार्मिक और बुनियादी शिक्षा पर विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर प्रो.अलाउद्दीन खान, प्रो.मुहीउद्दीन आज़ाद, डॉ. शफ़ीउज्जमां, डॉ. सिधार्थ सिंह, डॉ. तबरेज़ आलम, डॉ. शहरयार सहित शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। संचालन डॉ. अबू राफे ने किया।
रिपोर्ट-सुबास लाल

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