संविधान केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा है: वीके गिरी

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आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। अधिवक्ता परिषद् काशी प्रांत, आज़मगढ़ इकाई द्वारा संविधान दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन पुस्तकालय भवन, दीवानी न्यायालय परिसर में किया गया।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति वीके गिरि रहे, जिन्होंने संविधान की महत्ता, उसके मूल्यों और नागरिक दायित्वों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा है जो नागरिकों के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
विशिष्ट अतिथि जिला जज जयप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि संविधान हर नागरिक को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध कराता है, इसलिए जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
वक्ताओं ने भारत के संविधान निर्माताओं को नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया। कहा कि आज हम संविधान दिवस मना रहे हैं। 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान को स्वीकार किया गया, जो 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ। यह महान संविधान हमें न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व का मार्ग दिखाता है।
भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अम्बेडकर और संविधान सभा के सभी सदस्यों के अथक परिश्रम से हमें यह ऐतिहासिक दस्तावेज प्राप्त हुआ। संविधान न केवल हमारे अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि हमें हमारे कर्तव्यों का भी स्मरण कराता है।
मुकेश कुमार सिंह न्यायाधीश, सत्य प्रकाश राय, बहादुर सिंह, वीरेंद्र यादव, नीरज द्विवेदी, विनोद कुमार सिंह, दिवाकर सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन अधिवक्ता परिषद के महामंत्री पीयूष कुमार राय एवं नीरज द्विवेदी दीवानी अभिभाषक संघ के मंत्री ने किया।
रिपोर्ट-प्रमोद यादव/ज्ञानेन्द्र कुमार

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