फूलपुर आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। स्थानीय कोतवाली क्षेत्र में भूमि विवाद के मामलों में पुलिस द्वारा दोनों पक्षों पर एक साथ धारा 107/116 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई किए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतकर्ता और आरोपित दोनों को एक साथ पाबंद कर एसडीएम कोर्ट भेज देने से पीड़ित पक्ष को अपेक्षित न्याय नहीं मिल पाता।
सुदनीपुर गांव के अनुसूचित बस्ती में निर्माण कार्य को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ। एक पक्ष द्वारा रास्ते को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाया, जहां आपसी समझौते के बाद मामला शांत हुआ। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि भूमि की वास्तविक स्थिति और स्वामित्व की जांच राजस्व विभाग द्वारा कराए जाने की आवश्यकता है।
इसी प्रकार भोरमऊ गांव में वर्ष 2021 में खरीदी गई भूमि पर कब्जे को लेकर भी विवाद सामने आया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पर्याप्त साक्ष्य देने के बावजूद उन्हें कब्जा नहीं मिल सका और उल्टा शांति भंग की आशंका में कार्रवाई की तैयारी की गई। उनका कहना है कि लंबे समय से न्याय की अपेक्षा में अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक एसआई दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि भूमि संबंधी विवादों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से एहतियातन धारा 107/116 की कार्रवाई की जाती है। भूमि स्वामित्व का निर्धारण राजस्व विभाग द्वारा किया जाता है और उसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया होती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निष्पक्ष जांच के बाद दोषी पक्ष पर ही कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि वास्तविक पीड़ित को राहत मिल सके और अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाया जा सके।
रिपोर्ट-मुन्ना पाण्डेय