बिना रसायन सरसों की फसल में करें माहू कीट पर नियंत्रण

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आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। जनवरी माह में बदलते तापमान के कारण सरसों की फसल को माहू नामक कीट से खतरा है। इस समय सरसों की फसल में फूल आ चुके हैं। तापमान परिवर्तन से सरसों की फसल पर माहू यानी एफिड से फसल को काफी नुकसान हो सकता है। आम तौर पर किसान कीट प्रबंधन के लिए रसायनों का प्रयोग करते हैं, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. रणधीर नायक ने बिना रसायन के प्रयोग के भी माहू कीट पर नियंत्रण की तकनीक खोज निकाली है।
डा. नायक ने बताया कि महंगे और जहरीले रसायनों के छिडक़ाव से लागत बढऩे के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। ऐसे मेें लागत कम करने के लिए किसान कीटनाशकों के बजाय स्टिकी ट्रैप का उपयोग करके कम खर्च में फसलों को सुरक्षित कर सकते हैं। यह तकनीक कीटनाशकों के दुष्प्रभावों को कम करके पर्यावरण संरक्षण में मददगार साबित होगी। कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए स्टिकी ट्रैप आधुनिक तकनीक है, जिसमें पीले रंग कार्डबोर्ड की शीट होती है, जिस पर दोनों तरफ एक खास चिपचिपा पदार्थ लगा होता है जो माहू कीट को अपनी ओर आकर्षित करता है जिससे माहू कीट पीले रंग की ओर खिंचा चला आता है और पीले कार्डबोर्ड पर लगे गोंद से चिपक कर मर जाते हैं। इस विधि से बिना किसी कीटनाशक के कीटों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
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घर पर भी आसानी से तैयार कर सकते हैं पीला स्टिकी ट्रैप
आजमगढ़। पीला स्टिकी ट्रैप बाजार ले सकते हैं या घर पर कम खर्च में बना सकते हैं। इसके लिए एक पीली पॉलीथीन शीट, पीला कार्डबोर्ड या कोई कार्डबोर्ड लेकर पीले रंग से कलर कर दें (आकार 1 फीट-1 फीट या इससे बड़ा)। इस पर दोनों तरफ अरंडी का तेल (कैस्टर ऑयल) या ग्रीस अच्छी तरह लगा दें। यह चिपचिपा होता है और कीटों को फंसाता है। एक एकड़ सरसों की फसल में 15 से 20 पीले स्टिकी ट्रैप काफी होते हैं। स्टिकी ट्रैप को फसल के पौधों से 1-2 फीट ऊपर बांस या लकड़ी की छड़ी पर बांधें। हर 20-25 दिन में ट्रैप चेक करें। जब यह कीटों से पूरी तरह भर जाए तो नया ट्रैप लगा दें। ट्रैप को हमेशा फसल की ऊंचाई से थोड़ा ऊपर रखें, क्योंकि फसल बढ़ती रहती है। इस तरीके से कीटनाशकों पर होने वाला खर्च 70 प्रतिशत तक कम हो सकता है। स्टिकी ट्रैप के साथ सरसों की फसल में माहू कीट के प्रकोप की स्थिति में नियंत्रण के लिए जैविक रूप से नीम का तेल का भी प्रयोग भी कर सकते हैं। नीम तेल तीन मिली प्रति लीटर में स्टीकर के साथ घोलकर छिडक़ाव करें।
जब अधिकता में माहू का प्रकोप हो तभी रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें। रासायनिक नियंत्रण हेतु कीटनाशक थायक्लोप्रिड 21.7 प्रतिशत एससी या फिप्रोनिल पांच प्रतिशत एससी दवा का 0.5 मिली प्रति लीटर या ईमिडक्लरोप्रिड 17.8 एस एल 1 मिली प्रति तीन लीटर पानी में स्टीकर या शैंपू घोलकर छिडक़ाव करके माहू कीट का नियंत्रण कर सकते हैं।
रिपोर्ट-सुबास लाल

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