तटरक्षक जवान का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव, मचा कोहराम

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पटवध आजमगढ़ (सृष्टिमीडिया)। आजमगढ़। सगड़ी तहसील अंतर्गत मेघई गांव निवासी तिरंगे में लिपटे भारतीय तटरक्षक बल के जवान धनंजय सिंह का पार्थिव शरीर सोमवार को जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचा, पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया। घर के आंगन में पार्थिव शरीर रखा गया तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। माता उर्मिला देवी, भाई राजीव सिंह, संजय सिंह, अनुज सिंह और अन्य परिजन बिलख पड़े। गांव का प्रत्येक व्यक्ति उन्हें याद कर भावुक हो उठा।
भारतीय तटरक्षक बल के जवानों ने शहीद धनंजय सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद ‘भारत माता की जय’ और ‘वीर जवान अमर रहें’ के नारों के बीच शवयात्रा निकाली गई। सामाजिक संगठनों, जन प्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित कर अंतिम श्रद्धांजलि दी। देर शाम दोहरीघाट श्मशान घाट पर उनके छोटे पुत्र ने मुखाग्नि दी।
सुबह से ही घर पर जन प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का तांता लगा रहा। शहीद जवान को श्रद्धांजलि देने वालों में भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अरविंद कुमार जायसवाल, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि मनीष कुमार मिश्रा, संतोष कुमार सिंह (टीपू), वंश बहादुर सिंह, प्रवीण कुमार सिंह, चंद्रशेखर सिंह, अजेंद्र कुमार सिंह, दिवाकर सिंह, पारसनाथ सोनकर, श्रवण सिंह, मनोज कुमार श्रीवास्तव, जीयनपुर कोतवाल राजकुमार सिंह भी शामिल रहे। सभी ने पुष्प चढ़ाकर जवान को नमन किया और परिवार को ढांढस बंधाया।
इनसेट–
ड्यूटी पर जाते समय हुआ दर्दनाक हादसा

पटवध (आजमगढ़)। मेघई खास, जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र निवासी धनंजय सिंह वर्ष 2000 में भारतीय तटरक्षक बल में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वे केरल राज्य के कोच्चिपुर में तैनात थे। पत्नी सविता सिंह और बड़ा बेटा सूर्यांश उनके साथ रहते थे।
परिवार के अनुसार, 30 नवंबर को सविता सिंह के भाई विवेक का तिलक समारोह गोरखपुर में था। धनंजय सिंह 26 नवंबर को पत्नी को स्कूटी से एयरपोर्ट छोड़ने जा रहे थे। एयरपोर्ट से कुछ दूरी पहले ही एक तेज रफ्तार चारपहिया वाहन ने उनकी स्कूटी में जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। पहले नेवी अस्पताल में भर्ती किया गया, बाद में हालत बिगड़ने पर उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान 29 नवंबर को धनंजय सिंह ने दम तोड़ दिया, जबकि उनकी पत्नी का उपचार जारी है। धनंजय सिंह चार भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। पिता सुधाकर सिंह का पहले ही निधन हो चुका है।
रिपोर्ट-बबलू राय

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